2600 किमी दूर बिखरी सांस्कृतिक छटा, मंडी-कुल्लू के कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुति
छोटी काशी के कलाकारों ने तिरुमला में बढ़ाया प्रदेश का मान
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। विश्व पर्यटन दिवस पर मंडी और कुल्लू के कलाकारों ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित तिरुमला में आयोजित श्रीवारी सालकटला ब्रह्मोत्सव में हिमाचली लोक संस्कृति की शानदार प्रस्तुति दी। छोटी काशी कला केंद्र, मंडी के बैनर तले कलाकारों ने करीब 2,600 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर मंडयाली लोक नृत्य और पारंपरिक नाटी प्रस्तुत की। कलाकारों की प्रस्तुति से पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह दूसरा अवसर है, जब मंडी के कलाकारों ने तिरुपति बालाजी के मंच पर हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों से सुसज्जित कशिश, श्वेता, ईशा कुमारी सहित टीम के अन्य सदस्यों ने लय, ताल और उत्कृष्ट मंचीय अनुशासन के साथ अपनी प्रस्तुति दी और दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। इस अवसर पर छोटी काशी कला केंद्र के नृत्य प्रशिक्षक एवं कार्यवाहक डॉ. संतोष कुमार सांवरिया को कलाकारों के मार्गदर्शन के लिए श्री शठगोप रामानुज पेद्दा जीयर स्वामी की ओर से सम्मानित भी किया गया।
डॉ. सांवरिया ने कहा कि मंडयाली नागरिय और नाटी केवल नृत्य नहीं, बल्कि हिमाचल के लोक जीवन की जीवंत अभिव्यक्तियां हैं। पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोककला और संस्कृति के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम भी है। प्रस्तुति के पश्चात कलाकारों को तिरुपति बालाजी के दर्शन करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ।