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Mandi News: मकानों की यादें नहीं छोड़ रहीं पीछा, गम में डुबो रहीं

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धर्मपुर के स्याठी आपदा पीड़ित लोग ​शिविर में भोजन करते हुए। संवाद
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धर्मपुर (मंडी)। बड़ी मुश्किल से मकान बनाए थे। इन्हें संवारा था। इसमें लाखों रुपये खर्च हो गए। आपदा ने पलभर में ही मकानों को मलबे में बदल दिया। राहत शिविर में रह रहे स्याठी गांव के बाशिंदों ने कहा कि शिविर में रह तो रहे हैं लेकिन नींद नहीं आती। रह रह कर मकानों की याद आ रही है। माहौल गममीन हो रहा है। प्रभावित हल्कू राम, गुरदिताा, धनीराम, रिंपी देवी, दीप कुमार, विशाल, रवि कुमार, हंसराज और रत्न चंद ने कहा कि पाई-पाई एकत्रित कर मकानों को संवारा था।
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ऐसा नहीं सोचा था कि एक दिन मकान ही नहीं, जमीन से भी हाथ धो बैठेंगे। अब उनका क्या होगा। कब तक मंदिर की सराय में शरणार्थी बनकर रहेंगे। हालांकि यहां उन्हें समय-समय पर हर चीज मिल रही है। किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है लेकिन अपने मकानों की याद पीछा नहीं छोड़ पा रही है।
स्थानीय पंचायत प्रधान मीना देवी, पूर्व प्रधान देशराज पालसरा, उपप्रधान पृथी सिंह सहित पूरी पंचायत और समस्त दानी सज्जनों की ओर से बहुत ही अच्छी व्यवस्था खाने और रहने की है। ऐसा महसूस नहीं होने दिया जा रहा है कि वे बेघर हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने यहां आकर उनसे मिलकर उन्हें आश्वासन दिया है कि वह उन्हें सुरक्षित भूमि पर बसाने के लिए भूमि का प्रबंध करेंगे। कहा कि उनके तन पर केवल कपड़े ही बचे है, बाकी जीवनभर की पूंजी उनकी मकान के साथ ही खत्म हो गई। लोगों का जो साथ मिला है उससे वह अपने गम को भुलाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जो नुकसान होना था वह तो हो चुका है, अब आगे ऐसा कभी उनके बच्चों के साथ न हो इसलिए सुरक्षित भूमि मिल जाए यही इच्छा है।
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