देसी घी लिखकर जलेबी बेचने वालों पर कसेगा शिकंजा
नामी ब्रांड्स के घी भी जांच में फेल, खाद्य सुरक्षा विभाग कर रहा मिलावट खोरों के खिलाफ कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मंडी शहर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने देसी घी के सैंपल भरने की कार्रवाई तेज कर दी है। हालिया जांच और प्रयोगशाला परीक्षणों में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। बाजार में देसी घी के नाम पर बिक रहे कई नमूनों में मिलावट पाई जा रही है। यहां तक कि कुछ नामी ब्रांड के घी भी प्रयोगशाला जांच में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एक किलोग्राम शुद्ध देसी घी तैयार करने के लिए करीब 24 लीटर दूध अथवा उसकी क्रीम की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से शुद्ध घी की उत्पादन लागत काफी अधिक बैठती है। इसके बावजूद बाजार में 600 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से देसी घी की बिक्री हो रही है, जिससे इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग घी की शुद्धता जांचने के लिए बीआर रीडिंग समेत विभिन्न मानकों का इस्तेमाल करता है। शुद्ध गाय और भैंस के घी की बीआर रीडिंग 40.0 से 45.0 के बीच होनी चाहिए। यदि यह रीडिंग 40.0 से कम या 45.0 से अधिक आती है तो घी को अमानक माना जाता है। ऐसी स्थिति में घी में अन्य वसा या तेलों की मिलावट की आशंका होती है। इसके अलावा बीटा-सिस्टोस्टेरॉल टेस्ट के माध्यम से भी घी में वनस्पति तेलों की मिलावट का पता लगाया जाता है। शुद्ध दूध से बने घी में मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है, जबकि बीटा-सिस्टोस्टेरॉल पौधों से प्राप्त तेलों, जैसे पाम ऑयल या वनस्पति तेल में पाया जाता है। गैस क्रोमैटोग्राफी जैसी प्रयोगशाला जांच के माध्यम से घी में इनकी मौजूदगी की पुष्टि की जा सकती है।
अब केवल बीआर रीडिंग कम या ज्यादा आने के आधार पर ही मामले को नहीं देखा जा रहा है। प्रयोगशाला में विस्तृत केमिकल प्रोफाइलिंग के जरिये यह पता लगाया जा रहा है कि घी में दूध की वसा के अलावा अन्य किस प्रकार की वसा या तेल मौजूद है। यदि जांच में पाम ऑयल या वनस्पति तेल की मिलावट की पुष्टि होती है तो विभाग संबंधित व्यापारियों, हलवाइयों और ब्रांड के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और अदालत में मामला दर्ज कर रहा है।
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बाजार में देसी घी के नाम पर अमानक और मिलावटी सामग्री बेचने वालों पर विभाग की कड़ी नजर है। रूटीन के आधार पर घी के सैंपल भरे जा रहे हैं। सोमवार को आने वाली रिपोर्ट में जांच के परिणाम सामने आने की उम्मीद है। एलडी ठाकुर, सहायक आयुक्त, जिला खाद्य सुरक्षा विभाग, मंडी