नगर परिषद सुंदरनगर के 13 वार्डों में ठेके के आधार पर सफाई व्यवस्था से सुधरी हालत
यूसुफ अंसारी
डैहर (मंडी)। सुलभ और प्रभावी सफाई व्यवस्था के चलते सुंदरनगर नगर परिषद की देसी मॉडल पर आधारित डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना विदेशी तकनीक वाली अंडरग्राउंड डस्टबिन प्रणाली पर भारी पड़ रही है। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई अंडरग्राउंड डस्टबिन योजना विफल साबित हुई, जिसके बाद नगर परिषद ने अब पूरी तरह डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह व्यवस्था को अपनाया है।
कुछ वर्ष पूर्व करीब 5.5 करोड़ रुपये की लागत से शहर में आधुनिक अंडरग्राउंड डस्टबिन लगाए गए थे, लेकिन यह योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। डस्टबिनों के आसपास लगातार गंदगी फैलती रही और आवारा पशुओं का जमावड़ा भी बढ़ता गया। स्थिति यह रही कि अब केवल दो डस्टबिन शेष हैं, जिन्हें जल्द हटाने की तैयारी है।
नई व्यवस्था के तहत शहर के 13 वार्डों में ठेके के आधार पर सफाई कार्य किया जा रहा है। प्रत्येक वार्ड में सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है और कुल मिलाकर लगभग 117 कर्मचारी घर-घर जाकर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र कर रहे हैं। यह कचरा निर्धारित वाहनों के माध्यम से चांदपुर स्थित डंपिंग साइट तक पहुंचाया जाता है।
शहर में लगभग 12,000 घरों से नियमित रूप से कूड़ा संग्रह किया जा रहा है। इस व्यवस्था से न केवल स्वच्छता में सुधार हुआ है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
आय में भी वृद्धि
नगर परिषद इस सेवा के बदले प्रत्येक परिवार से न्यूनतम 50 रुपये मासिक शुल्क वसूल रही है, जबकि व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और मॉल के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित हैं। घर-घर कचरा संग्रह की सुविधा मिलने से लोग भी इस शुल्क का भुगतान सहजता से कर रहे हैं, जिससे नगर परिषद की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह सालाना करीब एक करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
डीएम नोडल अधिकारी नगर परिषद बलवीर सोनी का कहना है कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना सफलतापूर्वक कार्य कर रही है और इसी के चलते अंडरग्राउंड डस्टबिन योजना को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद सुंदरनगर ललित कुमार का कहना है कि यह योजना सभी वार्डों में निरंतर और प्रभावी रूप से संचालित हो रही है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई है।