मंडी। जिला मंडी के थमलाह गांव की हीरामणि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी है। दैनिक कार्य निपटाने के उपरांत खाली समय में वह खड्डी पर कुशलता से हाथ चला रही है। इस शौक को हुनर में बदला और कई महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा। इसमें सहायक बनी हैं हथकरघा को प्रोत्साहन प्रदान करने वाली प्रदेश सरकार की योजनाएं। हीरामणि ने बताया कि वह घर में खड्डी का काम करती थीं।
वर्ष 2021 में हिमाचल प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम के मंडी स्थित अधिकारियों से मिलने के बाद इस कार्य को व्यावसायिक तौर पर आगे बढ़ाने की सोची। स्यांज बाजार में दुकान किराए पर ली। निगम ने मास्टर ट्रेनर के तौर पर कार्य दिया। गांव की आठ महिलाओं को हैंडलूम का एक साल प्रशिक्षण दिया। ट्रेनर के तौर पर प्रतिमाह 7500 रुपये भी प्राप्त हुए। आज वह किन्नौरी और कुल्लू शैली की शॉल और मफलर तैयार करती हैं। इससे वह 15 से 20 हजार रुपये हर महीने कमा रही हैं। स्यांज की भूपेंद्र कुमारी भी शॉल इत्यादि बुनने का कार्य करती हैं।
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प्रदेश सरकार हथकरघा व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए निगम के माध्यम से लघु अवधि के विभिन्न प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। जिला में हाल में 90 से अधिक लोगों को हथकरघा बुनाई का प्रशिक्षण दिया है।
-अक्षय सिंह डोट, प्रभारी एवं सहायक प्रबंधक, हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम मंडी