दो विद्यार्थियों, शोधार्थियों को हर साल मिलेगी छात्रवृत्ति
सरदार पटेल विश्वविद्यालय परिसर में कार्यशाला में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरदार पटेल विश्व विद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि टांकरी लिपि केवल लेखन पद्धति नहीं बल्कि हिमालयी सांस्कृतिक चेतना की ऐतिहासिक अभिव्यक्ति है। इसका संरक्षण विश्वविद्यालय की बौद्धिक जिम्मेदारी है। मंडी नगर की 500 वर्षों की ऐतिहासिक विरासत के उपलक्ष्य में एसपीयू के इतिहास विभाग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की ओर से कार्यशाला का आयोजन मांडव परिसर में किया।
मुख्य वक्ता डॉ. कर्म सिंह ने इसे पहाड़ी राज्यों की राजकीय एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी लिपि बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वल्लभ महाविद्यालय के सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. पुष्प राज कपूर ने कहा कि यदि इस लिपि का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित नहीं किया गया तो क्षेत्रीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय विलुप्त हो सकता है। उन्होंने प्रतिवर्ष दो छात्रवृत्तियां, प्रत्येक एक हजार रुपये प्रति माह की दर से प्रदान करने की घोषणा की। चयन प्रक्रिया इतिहास विभाग द्वारा निर्धारित मानकों जैसे शोध-प्रस्ताव, लिपि-पठन दक्षता तथा क्षेत्रीय अभिलेखीय कार्य के आधार पर की जाएगी। डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि डॉ. यज्ञ दत्त शर्मा की ओर से प्रतिदिन टांकरी लिपि का प्रशिक्षण दिया जाएगा।