सुंदरनगर (मंडी)। राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेले के शुभारंभ पर शनिवार को परंपराओं का निर्वहन किया गया। सूक्ष्म रूप से पूजा-अर्चना की गई। मेला 17 से 21 अप्रैल तक मनाया जाता है। कोरोना के चलते मेलों के आयोजन पर प्रतिबंध है। मेले में सिर्फ परंपराओं का निर्वहन किया गया। पिछले साल भी मेला स्थगित कर दिया गया था।
राज्यस्तरीय सुकेत देवता मेले के प्रथम दिन सुकेत सर्व देवता कमेटी ने मेला ग्राउंड में सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद रोहांडा स्थित देव कमरूनाग, बखारी स्थित राज देवता मूल माहूंनाग, मडयुनी स्थित देव बडेयोगी, नालनी स्थित मूल बाड़ादेव, पांगणा स्थित महामाया, जयदेवी स्थित माहूंनाग तथा देवी कामाक्षा के मंदिर में जाकर देवता कमेटी ने देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा मेले का शुभारंभ किया।
पूजन के दौरान सभी मंदिर कमेटियों के गूर, पुजारी तथा कमेटी सदस्य मौजूद रहे। राज देवता माहूंनाग ने गूर के माध्यम से सुंदरनगर तथा समस्त जनता को आशीर्वाद दिया। सुकेत सर्व देवता कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अभिषेक सोनी ने कहा कि कमेटी देवी-देवताओं का पूजन प्रशासन से पहले करती है।
मूल माहूंनाग, देव महासू, देव बडेयोगी सहित देवताओं का पूजन चांबी गांव तथा बड़ादेव कमरूनाग का पूजन धनोटू पहुंचने पर करने की परंपरा है। आजादी के 74 वर्षों में पहली बार सुकेत देवता मेले के दौरान सुकेत सर्व देवता कमेटी ने पांगणा स्थित राज राजेश्वरी देवी महामाया की पूजा-अर्चना की।
जल्द ही सुकेत देवता कमेटी सभी मंदिरों की कमेटियों से मिलेगी तथा सुंदरनगर की जनता के सहयोग से सभी देवी देवताओं को आने वाले समय में मेले में लाने के प्रयास रहेंगे। इस मौके पर उपप्रधान देवकीनंदन, सुरेश शर्मा, आचार्य रोशन शर्मा, सचिव जयराम, सदस्य श्याम लाल, युधिष्ठिर, नानक चंद सहित कमेटी के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
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