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Mandi News: सौर ऊर्जा से बंजर खेतों में बही खुशियों की धार

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छज्जू राम अपने खेत में फसल को निहारते हुए। स्त्रोत जनसंपर्क विभाग
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मंडी। करसोग के कामाक्षा गांव के किसान छज्जू राम वर्मा ने साबित कर दिखाया कि सही तकनीक और मेहनत से बंजर जमीन भी सोना उगल सकती है। कभी सूखी और अनुपजाऊ पड़ी उनकी 25 बीघा जमीन अब सौर ऊर्जा प्लांट लगने से सिंचाई सुविधा मिलने के बाद हरी-भरी फसलों से लहलहा रही है।
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कुछ वर्ष पहले तक छज्जू राम पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या थी। बारिश पर निर्भर खेती से उत्पादन कम होता और आमदनी सीमित रहती। ऐसे में परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था।
राज्य सरकार की आर्थिक सहायता योजना के तहत उन्होंने चार किलोवाट का सोलर पावर प्लांट लगाया। इसकी कुल लागत 2.70 लाख रुपये थी, जिसमें सरकार ने 90 प्रतिशत खर्च वहन किया और केवल 10 प्रतिशत राशि किसान ने स्वयं दी। सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली की मदद से उन्होंने खेतों में मोटर द्वारा सिंचाई की स्थायी व्यवस्था कर ली।
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पानी की समस्या दूर होने के बाद उनकी खेती बदल गई। अब वह मौसम के अनुसार मटर, टमाटर, शिमला मिर्च और हरी मिर्च जैसी सब्जियां उगाते हैं। इसके अलावा उन्होंने प्लम का बगीचा भी लगाया है। आज सालाना आय करीब तीन से चार लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
यदि ऐसी सिंचाई और कृषि सहायता योजनाएं अधिक किसानों तक पहुंचें तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है। सौर ऊर्जा तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, क्योंकि इससे बिजली खर्च कम होता है और सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भरता घटती है। छज्जू राम वर्मा, किसान, कामाक्षा गांव

छज्जू राम अपने खेत में फसल को निहारते हुए। स्त्रोत जनसंपर्क विभाग

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