थुनाग उपमंडल से लापता हुए लोगों की तलाश में जुटे एसडीआरएफ जवान। स्त्रोत- विभाग
थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र में पिछले एक माह से लगातार बारिश और भूस्खलन ने तबाही मचाई हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 622 घर और 350 से अधिक गोशालाएं पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। मलबा हटाने के दौरान भी कई मकान ढहने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे नुकसान का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
इस भीषण आपदा में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 21 लोग अभी भी लापता हैं। राहत और पुनर्वास कार्यों में प्रशासन को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के 200 से अधिक लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं, जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ नजर आ रहा है। 35 परिवार पूरी तरह से भूमिहीन हो गए हैं, जिन्हें पुनर्वास देना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
लगातार हो रही बारिश से राहत कार्य बार-बार बाधित हो रहे हैं। चैल-जंजैहली सड़क बार-बार मलबा गिरने से बंद हो रही है, जबकि लंबाथाच-कलहणी-पंडोह और लंबाथाच-चिऊणी-शैटाधार मार्गों पर बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप है। इससे आवश्यक सामग्री की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
एसडीएम थुनाग रमेश कुमार ने बताया कि आपदा से निपटने और राहत पहुंचाने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। हालांकि, लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के चलते कार्य में रुकावटें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से राहत और पुनर्वास योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।
25 पंचायतों की पेयजल योजना से आपूर्ति ठप
25 पंचायतों को जल आपूर्ति देने वाली छड़ी खड्ड-शैटाधार उठाऊ पेयजल योजना पूरी तरह ठप है। इससे लोगों को पीने के पानी के लिए लंबा इंतजार और संघर्ष करना पड़ रहा है। सराज आपदा सुझाव मंच के संयोजक रजनीश शर्मा ने कहा कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी पुनर्वास समाधान की जरूरत है, ताकि वे दोबारा सामान्य जीवन जी सकें।