जोगिंद्रनगर (मंडी)। मिड-डे मील कार्यकर्ताओं की हड़ताल का असर सोमवार को उपमंडल के प्राथमिक और मिडल स्कूलों में देखने को मिला। विद्यार्थियों के दोपहर के भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए कई स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियों के सदस्यों ने रसोई का जिम्मा संभाला, जबकि शिक्षकों ने बच्चों को भोजन परोसने का कार्य किया। कुछ स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भी सेवाएं ली गईं।
शिक्षा खंड द्रंग प्रथम, चौंतड़ा-एक और चौंतड़ा-दो के तहत 200 से अधिक प्राथमिक पाठशालाओं में तीन हजार से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। मिड-डे मील कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर जाने के बाद स्कूल प्रबंधन के सामने भोजन व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे में कई विद्यालयों में एसएमसी सदस्यों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों ने मिलकर रसोई का संचालन किया। जोगिंद्रनगर के सबसे बड़े सीबीएसई स्कूल में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। यहां करीब 50 प्रतिशत मिड डे मील कर्मचारी हड़ताल पर रहे, जिसके चलते भोजन तैयार करने से लेकर विद्यार्थियों को परोसने तक की जिम्मेदारी शिक्षकों को निभानी पड़ी। वहीं चौंतड़ा और लडभड़ोल क्षेत्र के दुर्गम इलाकों के कुछ स्कूलों में भी एसएमसी सदस्यों और शिक्षकों ने श्रमदान कर व्यवस्था सुचारु रखी।
दोपहर के भोजन की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त प्रबंध करने पड़े। पहली से पांचवीं और आठवीं कक्षा तक सभी पात्र विद्यार्थियों को तय समय पर भोजन उपलब्ध करवाया गया। मनोज चौहान, प्राचार्य, सीबीएसई स्कूल जोगिंद्रनगर
प्राथमिक स्कूलों में विद्यार्थियों के दोपहर के भोजन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई स्कूलों में एसएमसी सदस्यों और शिक्षकों ने सहयोग किया। चौंतड़ा-एक शिक्षा खंड के सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों को भोजन की कोई समस्या नहीं आई। -कपिल राव, अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ, चौंतड़ा-एक