महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए मंडी के सेरी मंच पर सजाया जा रहा पंडाल।। स्त्रोत- विभाग
- फोटो : नवनिर्वाचित अध्यक्ष को प्रमाण पत्र प्रदान करते चुनाव अधिकारी।
मंडी। बड़ादेव कमरुनाग शनिवार को अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने के लिए मंडी पहुंचेंगे। बड़ादेव कमरुनाग के अलावा पांच अन्य देवी-देवता देव डगांढू शारटी, शुकदेव ऋषि थट्टा, बगलामुखी बाखली, बुढ़ी भैरवा पंडोह, बूढ़ा बिंगल और उनके साथ झाथी वीर भी पहुंचेंगे।
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में शिरकत करने वाले देव बूढ़ा बिंगल एकमात्र ऐसे देवता हैं जो नरोल की देवियों के साथ महोत्सव के शुरू से लेकर समापन तक राजमहल में ही रहते हैं। देव बूढ़ा बिंगल अपने वजीर झाथी वीर के बिना कहीं भी नहीं जाते हैं। देव बूढ़ा बिंगल के रथ की शैली उसे अन्य देवताओं से अलग करती है। इस देवता के मोहरे एक करंडी में विराजमान रहते हैं। देवता से अगर किसी तरह का संवाद करना हो तो वजीर झाथी वीर के रथ के माध्यम से किया जाता है। वजीर झाथी वीर का मूल स्थान भी देवता के मंदिर से कुछ दूरी पर है।
देव बूढ़ा बिंगल को त्रिलोकीनाथ के रूप में पूजा जाता है। मंडी शहर के साथ लगते रूंझ गांव में देवता का मंदिर है। सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिवपाल शर्मा का कहना है कि शनिवार से देवी देवताओं का महाशिवरात्रि में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
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