बढ़ती आबादी के दबाव से पुरानी पाइपलाइन पड़ी छोटी, बार-बार जाम हो रहे चैंबर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। शहर में सीवरेज व्यवस्था लोगों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनती जा रही है। आए दिन सीवरेज चैंबर अवरुद्ध होने से गंदा पानी सड़कों और गलियों में बहने लगता है, जिससे स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए कई बार संबंधित विभाग से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।
वर्ष 1992 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री पंडित सुख राम के प्रयासों से मंडी शहर को बड़े शहरों की तर्ज पर सीवरेज सुविधा से जोड़ने की योजना स्वीकृत की गई थी। उस समय आबादी कम होने के कारण सीवरेज निकासी के लिए अपेक्षाकृत छोटे व्यास की पाइपलाइन बिछाई गई थी लेकिन तीन दशक से अधिक समय बीतने के बाद बढ़ती आबादी और सीवरेज भार के चलते यह व्यवस्था अब पर्याप्त नहीं रह गई है। इसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर बार-बार चैंबर जाम होने की समस्या सामने आ रही है।
शहर में सीवरेज व्यवस्था का संचालन जल शक्ति विभाग की निगरानी में ठेके के माध्यम से किया जा रहा है। विभागीय कर्मचारियों के अनुसार कई लोग शौचालयों में कूड़ा-कचरा, गंदे कपड़े और डायपर आदि फेंक देते हैं, जिससे पाइपलाइन और चैंबर अवरुद्ध हो जाते हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर विभागीय अनुमति के बिना मकानों की सीवरेज लाइनें मुख्य चैंबर से जोड़ दी गई हैं, जिससे मलबा सीधे सिस्टम में पहुंचकर समस्या को और गंभीर बना रहा है। उधर, जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता देवराज ने बताया कि बरसात के दौरान नदी-नालों के किनारे क्षतिग्रस्त हुई पाइपलाइन को दुरुस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में भी सीवरेज व्यवस्था को सुधारने के लिए कार्य जारी है और योजना के तहत जल्द ही नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी।