गुरू गोबिंद सिंह की तपोस्थली कोलसर साहिब में सालाना समागम शुक्रवार से शुरू हुआ। इस स्थान पर गुरू गोबिंद सिंह जी महाराज ने मंडी प्रवास के दौरान तप किया था और इसी स्थान पर बैठ कर मंडी के राजा सिद्ध सेन को वरदान दिया था कि जैसे बची हांडी वैसे बचेगी तेरी मंडी, जो मंडी को लुटेंगे आसमानी गोले छूटेंगे।
गुरू नानक गोबिंद लहर मिशन द्वारा समूह इलाका निवासी साध संगत के सहयोग से 24 जनवरी को सालाना समागम मनाया जा रहा है। इस संबंध में शुक्रवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी का पावन सरूप पंच प्यारों की अगुवाई में कोलसर साहिब ले जाया गया। कोलसर साहिब में शुक्रवार को सालाना समागम के संबंध में श्री अखंड पाठ साहिब प्रारंभ हुए। जिनके भोग 24 जनवरी को सुबह 10 बजे पड़ेंगे। इसके बाद दो बजे तक कीर्तन दरबार सजाया जाएगा। जिसमें स्थानीय रागी जत्थे अपने मनोहर कीर्तन द्वारा संगत को निहाल करेंगे। समाप्ति के उपरांत गुरू का लंगर आयोजित किया जाएगा।
यह समागम हर वर्ष गुरू नानक गोबिंद लहर मिशन द्वारा कार सेवा प्रबंधक संत बाबा लाभ सिंह किला आनंदगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब वालों, गुरू की फौज सेवक सोसायटी, नौजवान सेवक जत्था, श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसायटी, नीलधारी संगत, नामधारी संगत, नेरचौक, लस्सी पधर, सुंदरनगर, भराडू, जोगिंद्रनगर, मंडी, पंडोह और कुल्लू की संगत के सहयोग से मनाया जाता है।