स्मार्ट सिटी को लेकर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से पूरी योजना बनाकर भेजने को कहा था। राज्य सरकार ने केवल धर्मशाला और हमीरपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए दस्तावेज भेजे थे, लेकिन वे पूरे नहीं थे। इसी बीच हाईकोर्ट से भी स्मार्ट सिटी को लेकर स्टे लगा रखा था।
स्मार्ट सिटी न मिलना राज्य सरकार की नाकामी है तथा अब अपनी नाकामी का ठीकरा राज्य सरकार हिमाचल के सांसदों और केंद्र सरकार के सिर फोड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए राज्य सरकार मंडी और शिमला का नाम भी भेज सकती थी मगर राज्य सरकार के मंत्रीगणों में आपसी समन्वय न होने के कारण मंडी और शिमला का जिक्र तक नहीं हुआ।
स्मार्ट सिटी के अलावा अन्य किसी भी बड़ी योजना को राज्य सरकार ने केंद्र में नहीं भेजा। जिससे प्रदेश को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के संदर्भ में हिमाचल के चारों सांसद प्रधानमंत्री से मिलेंगे और विस्तार से चर्चा करेंगे।