बिजाही रेस्ट हाउस में लगा दुर्लभ मीठा चेस्टनट का पेड़। संवाद
थुनाग (मंडी)। नाचन वनमंडल के बिजाही वन विश्राम गृह परिसर में एक अनोखा एवं दुर्लभ मीठा चेस्टनट वृक्ष (कैस्टेनिया सैटाइवा) पाया गया है। यह पूरे क्षेत्र में अपनी तरह का इकलौता वृक्ष है। यह विदेशी प्रजाति का सदाबहार वृक्ष समशीतोष्ण क्षेत्रों का मूल निवासी है, लेकिन हिमाचल की ठंडी जलवायु में खूब फल-फूल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह वृक्ष 500 से 1000 वर्ष तक जीवित रह सकता है। इसके मेवों की गुणवत्ता के कारण इसे यहां लाया गया था। वानस्पतिक दृष्टि से यह वृक्ष मजबूत है और 30 मीटर तक ऊंचा हो सकता है। इसके पत्ते लंबे और चमकीले हरे होते हैं, जबकि मेवे कांटेदार आवरण में बंद रहते हैं। भारत में यह प्रजाति मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, कुल्लू, कांगड़ा और शिमला की घाटियों में पाई जाती है। बिजाही में इसका होना असाधारण है।
नाचन वन मंडलाधिकारी सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि यह वृक्ष संरक्षण प्रयासों का हिस्सा है। इसे बढ़ावा देने के लिए बीज रोपण योजनाएं शुरू की जा सकती हैं। पर्यटन की दृष्टि से बिजाही वन विश्राम गृह एक लोकप्रिय पड़ाव है जहां लोग इस दुर्लभ वृक्ष को देखने आते हैं। सांस्कृतिक रूप से इसे रोटी का वृक्ष भी कहा जाता है, क्योंकि इसके मेवे भोजन का विकल्प बन सकते हैं। उधर, वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर वेद प्रकाश का मानना है कि ऐसे वृक्षों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन को मजबूत करेगा। संवाद