ग्राम पंचायत पखरैर की ग्राम सभा में उपस्थित पंचायत के लोग। संवाद
थुनाग (मंडी)। शिकारी देवी वन्य जीव अभयारण्य से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में ईको सेंसिटिव जोन का विरोध तेज हो गया है। संघर्ष समिति गठित करने के बाद ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। वीरवार को ग्राम पंचायत पखरैर में इस मसले पर विशेष ग्राम सभा हुई। इसकी अध्यक्षता प्रधान मोनिका ने की। सभी सदस्यों ने एक स्वर में ईको सेंसिटिव जोन का विरोध किया और शिकारी देवी वन्य जीव अभयारण्य को समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया।
उपस्थित सदस्यों ने कहा कि केंद्र ने क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने से पहले ग्रामीणों की राय नहीं ली। न ही वन विभाग और प्रशासन ने इस बारे में अवगत करवाया है। अब ग्रामीणों को उनके अधिकारों से वंचित रखने की साजिश रची जा रही है। वार्ड पंच सोहन लाल झैंकर ने बताया कि ग्रामसभा ने शिकारी देवी वन्य जीव अभयारण्य को निरस्त करने और ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना को वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया। इसे केंद्रीय वन पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, हिमाचल सरकार और स्थानीय प्रशासन को भेजा जा रहा है।
संघर्ष समिति के संयोजक नरेंद्र रेड्डी, धनदेव, चमन लाल, मोहर सिंह, ओम देव आदि ने विभाग पर आरोप लगाया है कि योजना का खाका तैयार करने से पहले सभी लोगों को अंधेरे में रखा गया। उन्होंने सरकार से मांग उठाई है कि मामले की गहनता से जांच की जानी चाहिए। योजना की प्रक्रिया से आम जनता को दरकिनार रखा और सरकार को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से 5 जनवरी 2022 को जारी अधिसूचना में साफतौर पर जिक्र किया है कि योजना में किसी व्यक्ति की ओर से पक्ष और विपक्ष के तौर पर कोई आपत्ति नहीं है।
नरेंद्र रेड्डी ने बताया कि ग्राम पंचायत संगलवाड़ा, गुनाह में 19 जनवरी को इसी मसले पर विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही है। ग्राम पंचायत धार जरोल और ढीम कटारु में भी विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी।