प्रशासनिक व्यवस्था ठप होने से अटका शिक्षकों का वेतन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भंगरोटू में प्रधानाचार्य के निलंबन के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन अटक गया है। इससे विद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, करीब 30 कर्मचारियों और स्कूल कांप्लेक्स से जुड़े सात कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों को घरेलू खर्च चलाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने बल्हघाटी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (कन्या) को सीबीएसई बोर्ड के स्कूल में मर्ज करने का निर्णय लिया था। हालांकि, स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) ने सरकार से इस पाठशाला को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से ही संबद्ध रखने का आग्रह किया था। इस दौरान विद्यालय में करीब 200 विद्यार्थियों ने दाखिला भी ले लिया था। इसके बाद सरकार ने स्कूल के प्रधानाचार्य किशन चंद के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, लोगों के बढ़ते विरोध और दबाव के बाद सरकार ने पाठशाला को सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध करने संबंधी अधिसूचना में बदलाव किया। अब विद्यालय में स्कूल शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम ही संचालित किया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान तोमर पाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हाल ही में विद्यालय के समायोजन (मर्जर) का निर्णय निरस्त कर छात्राओं, अभिभावकों और क्षेत्रवासियों की भावनाओं का सम्मान किया है। अब सरकार को विद्यालय में सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रधानाचार्य किशन चंद का निलंबन भी वापस लेना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन जल्द जारी करने की मांग की है। वहीं, उच्च शिक्षा उपनिदेशक यशवीर धीमान ने कहा कि प्रधानाचार्य के निलंबन की कार्रवाई उच्च अधिकारियों के स्तर पर की गई है। यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।