मंडी। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने भूमि अधिग्रहण मुआवजे से जुड़े मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने एनएचएआई द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए मध्यस्थ के 7 जुलाई 2023 के उस आदेश को सही ठहराया है, जिसमें प्रभावित भू-मालिकों को वैधानिक लाभ देने का निर्देश दिया गया था।
कुल्लू जिले में नेशनल हाईवे-21 के फोरलेन निर्माण के लिए वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने भूमि अधिग्रहित की थी। सक्षम प्राधिकारी द्वारा 28 नवंबर 2016 को तय किए गए मुआवजे से भू-मालिक लेखरी उर्फ लेसरी और उनके उत्तराधिकारी संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने इस मामले को मध्यस्थ के समक्ष उठाया था।
मध्यस्थ ने भूमि मालिकों की बाजार मूल्य बढ़ाने की मांग तो खारिज कर दी, लेकिन उचित मुआवजा अधिनियम 2013 के तहत ब्याज और अन्य वैधानिक लाभ देने का आदेश दिया। इसमें पहले वर्ष 9 प्रतिशत और उसके बाद 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज शामिल था। एनएचएआई ने इसे यह कहते हुए अदालत में चुनौती दी थी कि 2013 का अधिनियम राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम पर पूर्ण रूप से लागू नहीं होता।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जब तक मध्यस्थ का अवार्ड स्पष्ट रूप से अवैध या सार्वजनिक नीति के खिलाफ न हो उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि मध्यस्थ द्वारा दिया गया लाभ कानून के अनुरूप है, जिसके बाद एनएचएआई की अपील को खारिज कर दिया गया।