सरकाघाट (मंडी)। क्षेत्र के प्रसिद्ध शक्तिपीठ नबाही माता में कथित तौर पर हुई धांधली पर प्रदेश सीआईडी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मामले में सीआईडी ने सात वर्ष पुराना रिकार्ड भी खंगालना शुरू कर दिया है। विभाग की एक टीम पिछले दिनों से वर्ष 2008 से लेकर 2014 तक का स्पेशल ऑडिट एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से करवा रही है।
नबाही माता मंदिर का प्रदेश सरकार ने वर्ष 2007 में अधिग्रहण किया था। गत सात वर्षों में मंदिर की आय और व्यय में हुई बढ़ोतरी और कथित तौर पर हुई धांधली पर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए थे। दो वर्ष पूर्व हरि बैहना पंचायत निवासी और समाजसेवी डॉ. विनोद ठाकुर ने सूचना के अधिकार के तहत ली गई सूचना पर धांधली का मामला उजागर हुआ था। सीआईडी विभाग को गोपनीय सूचना देकर सारे गोलमाल का रिकॉर्ड सहित उपलब्ध करवाया गया था।
शिमला के भराड़ी पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। लेकिन नबाही मंदिर बचाओ समिति के अध्यक्ष ललित जम्वाल और समिति के सदस्यों ने विशेष ऑडिट की प्रदेश सरकार से मांग की है और विभाग द्वारा एक सीआईडी इंस्पेक्टर, एक मुख्य आरक्षी और चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेंद्र कुमार की टीम को विशेष ऑडिट करने के लिए तैनात किया गया है। टीम गत सात वर्षों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बड़े गोलमाल के बाहर आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि सीआईडी के अधिकारी कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं। उधर, मंदिर बचाओ कमेटी के अध्यक्ष ललित जम्वाल ने इस विशेष ऑडिट को देर से उठाया गया सही कदम बताया। आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है। सीआईडी के डीएसपी मनोहर लाल ने विशेष जांच की पुष्टि की है।