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मेडिपर्सन एक्ट पर अध्यादेश निकालो वरना जारी रहेगा संघर्ष : जीवानंद

Sun, 29 Jan 2017 10:20 PM IST
मंडी
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सुंदरनगर (मंडी)। हिमाचल प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जीवानंद चौहान और महामंत्री डॉ. पुष्पेंद्र का कहना है कि जब तक प्रदेश सरकार मेडिपर्सन एक्ट को गैर जमानती बना कर इसके लिए अध्यादेश नहीं निकालती, प्रदेश में चिकित्सा अधिकारी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि मेडिपर्सन एक्ट को विधि विभाग के पास परामर्श के लिए भेजा गया है। लेकिन, विधि विभाग ने एक्ट में क्या प्रावधान किए हैं और इसमें चिकित्सक संघ की किन मांगों को शामिल किया गया है, इस बारे में संघ को कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं है।
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सरकार की ओर से इस बारे में कोई भी अधिकारिक सूचना नहीं आ रही है, जो सूचना आ रही है वह केवल मीडिया के माध्यम से ही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि अगर उसने एक्ट का प्रपोजल तैयार कर लिया है तो उसे सार्वजनिक किया जाए और उसमें जो प्रावधान है, उस पर संघ की प्रदेश एक्शन कमेटी को चर्चा के लिए टेबल पर बुलाया जाए। वर्तमान में देश के 16 राज्यों में मेडिपर्सन एक्ट लागू है, लेकिन हिमाचल प्रदेश जिसे स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अनेकों पुरस्कार दिलाने में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टॉफ व कर्मचारियों ने मेहनत की है कि अब तक इसकी अनदेखी हो रही है।

संघ मेडिपर्सन एक्ट को लागू करने के साथ ऊना के डा. दलजीत सिंह की मौत के जिम्मेवार लोगों और  वहां के उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक पर कार्रवाई की भी पुरजोर मांग करता है। यही नहीं प्रदेश के वित्त विभाग के पास जो संघ की मांगें लंबित पड़ी हैं, उनको जब तक स्वीकृति प्रदान नहीं की जाती, संघर्ष बंद नहीं किया जाएगा। संघ की प्रमुख मांगों में मेडिपर्सन एक्ट में गैरजमानती का प्रावधान, चिकित्सकों की नियुक्ति अनुबंध के बजाय तदर्थ आधार पर करना जैसा 2003 से पहले होता था और तदर्थ आधार पर सेवाएं दे रहे चिकित्सकों को 4-9-14 टाइम स्केल का वित्तीय लाभ देना आदि शामिल है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इन सभी मांगों पर जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करने को कहा है अन्यथा आने वाले दिनों में संघर्ष को और गति देने की बात कही है। सरकार की इस मामले में मूकदर्शता कई सवालों को खड़ा कर रही है।
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