मनरेगा सहित अन्य विकास कार्यों में नियमों के उल्लंघन और ठेकेदारों को निर्धारित राशि से अधिक भुगतान किए जाने की शिकायत सामने आई थीं। शिकायतकर्ता चुनी लाल की शिकायत पर विकास खंड स्तर पर जांच समिति गठित की गई थी। समिति की रिपोर्ट में अनियमितताएं पाए जाने के बाद पंचायत अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी गई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण प्रधान, उपप्रधान व तीन पंचायत सदस्यों को निलंबित किया गया है। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर निलंबित पंचायत प्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध जताया है और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। ऐसे में कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले की गई यह कार्रवाई संदेह के घेरे में है।
उधर, विकास खंड अधिकारी बालीचौकी भूपनेश चड्ढा ने बताया कि जांच के दौरान मनरेगा व अन्य विकास कार्यों में वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई, जिसके बाद निलंबन के आदेश जारी हुए।
अगर हमने कोई घोटाला किया होता तो हमें पहले ही निलंबित कर दिया जाता। पंचायत चुनाव से ठीक तीन दिन पहले यह कार्रवाई यह साबित करती है कि मुझे चुनाव से दूर रखने की साजिश रची गई है। मैंने हमेशा समाज के लिए काम किया है और निजी खर्च पर भी लोगों की मदद की है। कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए मुझे निशाना बना रहे हैं। -संत राम, उपप्रधान, पंचायत सुधराणी
31 जनवरी 2026 को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले इस प्रकार की कार्रवाई तर्कसंगत नहीं है। यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। इस मामले को लेकर वे अपील करने और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की भी तैयारी कर रहे हैं। - केशव राम, प्रधान, पंचायत सुधराणी