मंडी। देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने वाले क्रांतिकारियों में से एक मंडी के भाई हिरदा राम को शहीद भगत सिंह ने अपना भी प्रेरणा स्रोत माना था। भगत सिंह ने अपनी एक चिट्ठी में इसका जिक्र किया है, जो हिरदा राम के परिवार के हाथ लगी है।
यह जानकारी भाषा एवं संस्कृति विभाग को भी है। सोमवार को इंदिरा मार्केट की छत पर स्वतंत्रता सेनानी भाई हिरदाराम की जयंती के अवसर पर यह बात साहित्यकार केके नूतन ने कही। वह एक सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अहम भूमिका निभाई। हिमाचल राज्य की शिक्षा में छठी कक्षा के पाठ्यक्रम में उनकी जीवनी को शामिल किया गया है।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम का आगाज स्कूली छात्राओं ने मातृ वंदना से किया। भाई हिरदा राम के परिजनों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया, लेखक गंगाराम, उमेश शर्मा और शमशेर सिंह कार्यक्रम का हिस्सा बने।
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एसपीयू में भाई हिरदा राम की जीवनी पर हो शोध
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सह गोसेवा प्रमुख हरमीत सिंह बिट्टू ने स्वतंत्रता सेनानी हिरदा राम की जीवनी को प्रकाशित कराने के लिए प्रसिद्ध साहित्यकार केके नूतन की सराहना की। उन्होंने सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में शोध के रूप में भाई हिरदाराम की जीवनी को शामिल करने की मांग रखी।
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1885 में हुआ था जन्म
भाई हिरदा राम का जन्म मंडी जिले में 28 नवंबर 1885 में हुआ था। उन्होंने मंडी में गदर पार्टी की स्थापना की। भगत सिंह ने अपनी चिट्ठी में भाई हिरदा राम को अपना प्रेरणास्रोत बताया है। लाहौर बम षड्यंत्र में गिरफ्तार होने के बाद भाई हिरदा राम ने आजीवन कारावास की सजा काला पानी में काटी।
उस वक्त काला पानी में बंद स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की यातना का विरोध किया था। 1929 में आजीवन कारावास की सजा काट भाई हिरदा राम मंडी आए, लेकिन उन्हें अंग्रेज सरकार ने देश आजाद होने तक घर आने नहीं दिया था। 1965 में इनका देहांत शिमला अपने बेटे रणजीत सिंह के पास हुआ।