कोटली (मंडी)। दुर्गम क्षेत्र समराहण के सेवानिवृत्त अध्यापक बीरी सिंह आज भी विद्यार्थियों का पढ़ा रहे हैं। वह मिडल स्कूल समराहण के अवैतनिक सेवाएं दे रहे हैं।
लगभग 40 वर्ष पहले शिक्षा की मशाल हाथ में थाम कर समाज को रोशन करने का जो बीड़ा उठाया उसे सेवानिवृत्ति के बाद भी बुझने नहीं दिया। वह कोरोना काल में भी विद्यार्थियों में शिक्षा की लौ दिखाते रहे। समराहण स्कूल में बीते दो सालों से शास्त्री का पद रिक्त चल रहा है।
बीरी सिंह की मौजूदगी के चलते विद्यार्थियों को शिक्षक की कमी महसूस नहीं हुई। शिक्षा के क्षेत्र में बीरी सिंह के कॅरिअर की शुरुआत सन 1981 में जेबीटी अध्यापक के रूप में हुई। उनकी नियुक्ति प्राथमिक पाठशाला गुजरा रा रोपड़ू में अध्यापक के तौर पर हुई थी।
तकरीबन 15 साल के संघर्ष के बाद उन्हें 1996 में बागी कटौला में शास्त्री के पद पर नियुक्ति मिली। 2013 में वह सलेतर से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने समाज के प्रति अपना दायित्व निभाने का संकल्प नहीं छोड़ा। बीरी सिंह राजपूत सभा की कोटली इकाई के प्रधान हैं और बग्गी तुंगल में होने वाले मेला कमेटी के महासचिव की जिम्मेदारी कई वर्षों से संभाले हैं। संवाद