नेरचौक (मंडी)। बल्ह क्षेत्र के नेर जंगल में तेंदुओं और नील गायों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। नर, मादा तेंदुए अब तक ग्रामीणों के करीब एक दर्जन से अधिक पालतू कुत्तों और भेड़-बकरियाें को निवाला बना चुके हैं।
नील गाय फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। तेंदुए दिन दहाड़े ग्रामीण रास्तों में बेखौफ घूमते देखे जा सकते हैं। ग्रामीण अपने बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के प्रति चिंतित हैं। सुबह और दोपहर को अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने के लिए ग्रामीण समूहों में जाने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी योगराज, रणवीर सिंह, विशाल, रीता, चंचल आदि का कहना है कि नेर जंगल में तेंदुए और नील गाय होने से गहरा, टिकरी, नारु, सैहल गांवों के 100 से अधिक परिवार डर के साए में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुओं का पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है। पैडी पंचायत के उप प्रधान ललित सिपहिया ने बताया कि उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीणों की समस्या का निवारण किया जाए। डीएफओ वासु डोगर ने कहा कि नेर गांव के लोगों की ओर से इस बारे में विभाग को शिकायत मिली है। शीघ्र ही गांव में विभागीय टीम को भेजा जाएगा। जरूरत होने पर पिंजरा भी लगाया जाएगा। संवाद