गोहर (मंडी)। जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में बलिदान हुए नायब सूबेदार राकेश कुमार के परिवार को सरकार से मिले आश्वासन साल बाद भी पूरे नहीं हुए हैं। मंडी जिले की छम्यार पंचायत के बरनोग गांव के नायब सूबेदार राकेश कुमार ने किश्तवाड़ में आतंकी हमले में सीने पर गोलियां खाकर देश के लिए बलिदान हुए थे। प्रभावित परिवार को आज भी सरकार से मिले आश्वासनों के पूरे होने का इंतजार है। बलिदानी का घर नहीं बना, न बलिदानी की वीरांगना को नौकरी और अन्य सुविधाएं नहीं मिलीं।
बलिदान के बाद बड़े-बड़े दावे करने वाले नेताओं और अधिकारियों ने एक साल बीत जाने के बाद उसके परिवार की सुध नहीं ली। पत्नी भानू एक अदद छत बनाने के लिए संघर्षरत हैं। राकेश की बुजुर्ग माता की आंखें बेटे का जिक्र करते ही नम हो जाती हैं। उनका कहना है कि उन्हें न तो सरकार से कोई मदद मिली और न ही जनप्रतिनिधियों ने उनके लिए कोई व्यवस्था की है। बलिदानी के परिवार को सिर ढकने के लिए आज भी मकान नहीं बन पाया।
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हमें सियासत नहीं, मदद चाहिए
बलिदानी की वीरनारी भानूप्रिया ने कहा कि हमें सरकार की सियासत नहीं, बल्कि मदद चाहिए। दो साल पहले आपदा में ध्वस्त मकान को बनाने के लिए सरकार और प्रशासन की ओर से बड़ी-बड़ी बातें कही गई थीं। पति के बलिदान के समय अनेक नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिए थे, जो आज दिन तक कोरे साबित हुए है। मेरे परिवार के हिस्से में अब तक सिर्फ संघर्ष और वीरनारी का तगमा ही आया है।