गोहर के दुगराईं की हेमा मुर्गियों का दाना डालते हुए। स्त्रोत - विभाग
15 दिन से एक महीने का लिया प्रशिक्षण, बाजार में है चिकन की काफी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। गोहर उपमंडल के दुगराईं गांव की रहने वाली हेमा देवी ने हिम कुक्कुट पालन योजना के तहत आत्मनिर्भरता की राह चुनी है। योजना के तहत मुर्गी पालन पर कुल पूंजी निवेश का 60 प्रतिशत अनुदान सरकार की ओर से दिया जाता है। किसानों द्वारा सिर्फ 40 प्रतिशत ही खर्च किया जाता है।
इस योजना के तहत सबसे पहले लाभार्थी किसान को सरकारी पोल्ट्री फार्म में लगभग 15 दिनों से एक महीने तक प्रशिक्षण करवाया जाता है। इसके बाद लाभार्थी किसान को मुर्गी के 3000 चूजे दिए जाते हैं। यह चूजे एक-एक हजार की तीन किस्तों में उपलब्ध करवाए जाते हैं। हेमा देवी का कहना है कि सभी प्रकार की औपचारिकताओं के बाद जुलाई 2024 में उन्हें विभाग द्वारा तीन हजार चूजों की पहली किस्त के तौर पर मुर्गी के एक हजार चूजे दिए गए। बताया कि बाजार में चिकन की मांग अधिक होने पर उन्हें अच्छे दाम मिल जाते हैं। एक हजार मुर्गों पर 50 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक अनुमानित लाभ अर्जित कर लेते हैं। मुर्गी शैड के लिए भी सरकार की ओर से उन्हें एक लाख 60 हजार रुपये सब्सिडी प्रदान की जा रही है। पशु चिकित्सा अधिकारी गोहर डॉ. नवनीत चंदेल का कहना है कि हिम कुक्कट पालन योजना तहत उपमंडल में ऐसे किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है जिनका प्राथमिक व्यवसाय कृषि व पशुपालन है। इससे किसानों को खेतीबाड़ी के साथ अतिरिक्त आय के बेहतर साधन उपलब्ध हुए हैं।