मंडी। इस बार डायरिया से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक महीना पहले जागरूकता अभियान शुरू करेगा। पहले यह पखवाड़ा जुलाई के अंत और अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में चलता था। तब तक डायरिया से पीड़ितों का अस्पताल आना शुरू हो जाता था। कई बार स्थिति काफी पेचीदा हो जाती थी। लेकिन, इस बार बरसात के मौसम से पहले डायरिया रोग से निपटने की कवायद शुरू की गई है।
स्वास्थ्य विभाग सूबे में डायरिया के खिलाफ इस बार 12 से 26 जून तक जागरूकता पखवाड़ा मनाएगा। जिस कारण इस बार स्वास्थ्य विभाग ने एक महीना पहले ही जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है। पखवाड़े के तहत प्रदेश के सभी उपस्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, सिविल अस्पताल, जोनल अस्पताल सहित मेडिकल कॉलेजों में जिंक सेंटर खोले जाएंगे। इन सेंटर पर जिंक टैबलेट की खुराक के बारे में महिलाओं को जानकारी दी जाएगी। अभियान में आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर पांच साल से कम आयु के बच्चों को ओआरएस पैकेट देंगी और बच्चों के अभिभावकों को ओआरएस पिलाने के बारे में जानकारी देगी। यह अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पूरे प्रदेश में किया जाएगा। गौर हो कि देश में प्रति वर्ष पांच साल से कम आयु के मरने वाले बच्चों में 100 में से लगभग 13 बच्चे डायरिया रोग के कारण मरते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्वभर में डायरिया रोग से मरने वालों बच्चों में भारत टॉप 10 देशों में आता है। उधर, स्वास्थ्य विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी डा. अनुराधा ने कहा कि बच्चों को डायरिया रोग से पीड़ित होने के पहले जागरूकता पखवाड़ा मनाया जाएगा।
इस तरह चलेगा अभियान
आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर घर में जहां पांच साल से कम आयु के बच्चे हैं, वहां पर ओआरएस के पैकेट देंगी। इसके अलावा बच्चों की माताओं और दो-चार घरों की महिलाओं को एक स्थान पर इकट्ठा करके डायरिया रोग के बारे में जागरूक करेंगी। ओआरएस बनाने की विधि के बारे में बताया जाएगा।