सराज के किसानों को मिल रही बंपर कीमत
20 दिन पहले बाहरी मंडियों में 250 रुपये किलो तक पहुंचे थे दाम
थाची, सोमागाड़, थाटा, बागाचनोगी और कहलणी में फसल तैयार
रोजाना पांच से सात गाड़ियां मटर लेकर जा रहीं मंडियों में
संवाद न्यूज एजेंसी
बालीचौकी (मंडी)। सराज घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हरे मटर के अच्छे दाम मिलने से किसानों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, मौसम की मार के कारण इस बार फसल का उत्पादन प्रभावित हुआ है। किसानों को खेतों से ही मटर के 100 से 130 रुपये प्रति किलो तक भाव मिल रहे हैं। करीब 20 दिन पहले बाहरी मंडियों में मटर के दाम 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे।
घाटी के थाची, सोमागाड़, थाटा, बागाचनोगी और कहलणी क्षेत्रों में इन दिनों मटर की फसल तैयार हो रही है। खेतों से तुड़ाई के बाद मटर सीधे खरीदारों तक पहुंचाया जा रहा है। क्षेत्र से रोजाना पांच से सात गाड़ियां मटर लेकर प्रदेश और बाहरी राज्यों की मंडियों के लिए रवाना हो रही हैं। खेतों से ही खरीद होने के कारण किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने की परेशानी भी नहीं उठानी पड़ रही है।
इस बार किसानों को मौसम की बेरुखी का सामना करना पड़ा है। समय पर बारिश नहीं होने से फसल प्रभावित हुई, जबकि बाद में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने भी नुकसान पहुंचाया। इसके चलते मटर का कुल उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाया। इसके बावजूद बची हुई फसल के अच्छे दाम मिलने से किसानों को कुछ राहत मिली है।
सराज घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसान गेहूं और जौ की बिजाई के बाद हरे मटर की खेती करते हैं। मटर यहां की प्रमुख नगदी फसलों में शामिल है। स्थानीय किसान काहन सिंह, रमा देवी और कौर सिंह ने बताया कि करीब 20 दिन पहले बाहरी मंडियों में मटर के दाम 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे। अब खेतों से ही 100 से 130 रुपये प्रति किलो तक भाव मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि सूखे और ओलावृष्टि की मार नहीं पड़ती तो इस बार उत्पादन अधिक होता और उन्हें बेहतर मुनाफा मिल सकता था।
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40 क्विंटल से अधिक मटर का बीज बिका
क्षेत्र में किसान 40 क्विंटल से अधिक मटर का बीज खरीद चुके हैं। किसानों को मटर के अच्छे दाम मिल रहे हैं लेकिन बीच में हुई ओलावृष्टि से फसल को नुकसान पहुंचा है।
-भीम देव, कृषि विकास अधिकारी, बालीचौकी