जिला के सरकारी स्कूलों को अब सालाना पत्रिका छपवानी होगी। पत्रिका में बच्चों के लेख छपवाएं जाएंगे। पत्रिका के माध्यम से अध्यापक बच्चों के भीतर छुपी प्रतिभा को बाहर लाने के प्रयास करेंगे। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल मुखियाओं को निर्देश जारी कर दिए हैं।
जिला में उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले सभी स्कूलों को सालाना पत्रिका छपवाना अनिवार्य किया गया है। स्कूल पत्रिका में केवल बच्चों की ओर से लिखे गए लेख, कविता, कहानियां और अन्य चीजें शामिल की जाएंगी ।
अध्यापकों की देखरेख में पत्रिका का कार्य भी बच्चों के माध्यम से ही करवाया जाएगा। पत्रिका में बच्चे अपने अनुभव भी साझा कर सकते हैं। जिला के अधिकतर स्कूलों में पत्रिका छापी जाती है, लेकिन कुछ स्कूलों में पत्रिका को लेकर लापरवाही बरती जाती है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में बजट का अभाव वह पत्रिका के लिए बच्चों से लेख लेकर स्कूल आईटी लैब में इसे स्वयं भी तैयार कर सकते हैं। उपनिदेशक मंडी औचक निरीक्षण अभियान के तहत ग्रीष्मकालीन स्कूलों में पत्रिका के कार्य को लेकर भी जायजा लेंगे और बच्चों से भी इस बारे फीडबैक लिया जाएगा, ताकि बच्चे अपनी भावनाएं दूसरों के साथ शेयर कर सकें। स्कूल पत्रिका का नाम भी रखना होगा।
पत्रिका में विभिन्न गतिविधियों में अव्वल रहे बच्चों के फोटो सहित नाम भी प्रकाशित किए जाएंगे। वहीं, शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि समय रहते स्कूल का वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह आयोजित करें, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
इधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक सुशील पुंडीर ने बताया कि सभी स्कूल सालाना पत्रिका छपवाने के लिए बच्चों से लेख लें और इसे छपवाएं। स्कूल प्रबंधन समय रहते सालाना समारोह मनाएं।