फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mandi News: औषधीय पौधों की खूशबू से महकेंगे सरकारी स्कूल और कॉलेज

Thu, 18 Jul 2024 07:31 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
विज्ञापन
जोगिंद्रनगर में आयुष विभाग की नर्सरी में तैयार औषधीय पौधे। -फाइल फोटो
विज्ञापन
जोगिंद्रनगर (मंडी)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में जल्द औषधीय पौधों की खुशबू महकेगी और वातावरण सुगंधित होगा। इसके लिए आयुष विभाग सरकारी स्कूलों और कॉलेज में आयुष गार्डन विकसित करने की योजना तैयार कर रहा है। जलवायु के आधार पर सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में करीब 30 प्रजातियों के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे।
विज्ञापन

योजना के तहत करीब दो लाख औषधीय पौधे प्रदेश के 10 जिलों में रोपे जाएंगे। इनमें मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा, सिरमौर, सोलन, शिमला जिला भी शामिल हैं। जारी अधिसूचना के तहत मंडी जिला के जोगिंद्रनगर स्थित आयुर्वेद वनस्पति संग्रहालय के प्रभारी उज्ज्वल शर्मा से इस संबंध में पत्राचार शुरू हुआ है।
आयुष विभाग के माध्यम से पूर्व में विकसित हर्बल गार्डन की जानकारी मांगी गई है। वहीं शैक्षणिक संस्थानों के आवेदन के बाद ही यहां पर फिर आयुष गार्डन विकसित की योजना पर कार्य शुरू होगा। बता दें कि शैक्षणिक संस्थानों में अगर कोई भी हर्बल गार्डन विकसित करना चाहता है तो 500 वर्ग फुट भूमि औषधीय पौधों के लिए आरक्षित होना जरूरी है। आयुष विभाग औषधीय पौधों के लगाने की विधि और उनके संरक्षण पर प्रशिक्षण देगा। इसके बाद ही आयुष गार्डन स्थापित करने की मंजूरी मिलेगी।
विज्ञापन

जोगिंद्रनगर अनुसंधान संस्थान व आयुर्वेद वनस्पति संग्राहलय के प्रभारी उज्ज्वल शर्मा ने बताया कि आयुष विभाग के आदेशों के अनुरूप नर्सरी में औषधीय पौधों को तैयार किया गया है। इस साल दो लाख अश्वगंधा के पौधों के साथ लैमनग्रास, अर्जुन, सर्पगंधा, जामुन के अलावा हरड़, भेड़ा सहित 30 प्रजातियों के पौधे आयुष गार्डन में रोपने की आधिकारिक अनुमति मिलने के बाद यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतारा जाएगा।

नर्सरी में लाखों पौधे तैयार
सरकारी स्कूलों और कॉलेज में आयुष गार्डन स्थापित करने के लिए आयुष विभाग की नर्सरी में लाखों औषधीय पौधे तैयार हो चुके हैं। शिमला के रोहडू, सारीबासा, हमीरपुर के नेरी, बिलासपुर के जंगल, जलोड़ा हर्बल गार्डन में औषधीय पौधों की नर्सरी तैयार की गई है। जिला कांगड़ा के रक्कड़, करसोग के सूरल में भी निजी नर्सियों में औषधीय पौधे तैयार किए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें