स्वयं हल्दी उगाकर किसानों को भी खेती का दे रहे प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर(मंडी)। जंगली जानवरों और बेसहारा पशुओं से तंग आकर हल्दी की खेती शुरू करने वाले सुंदरनगर के चांबी पंचायत के ड्रमन गांव निवासी श्रवण कुमार लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। कृषि विभाग की मदद से हल्दी की खेती शुरू करने के नौ महीने बाद ही परिणाम सामने आने लगे हैं। खेत हल्दी की खेती से लहलहा रहे हैं।
बेसहारा पशु और जंगली जानवर भी खेती को नहीं उजाड़ रहे हैं। श्रवण कुमार ने बताया कि हल्दी की फसल को तैयार करने में नौ महीने लगते हैं। हालांकि मंडी की पारंपरिक हल्दी को तैयार होने में तीन साल लगते हैं। वे अपने खेतों में काली, सफेद ,पीली और मंडी की पारंपरिक हल्दी उगाते हैं। काली और सफेद हल्दी में औषधीय गुण होने के वजह से यह हल्दी 800 रुपये से एक हजार रुपये प्रति किलो बिकती है। जबकि पीली हल्दी सामान्य 90 से 100 रुपये किलो बिक जाती है। मंडी की पारंपरिक हल्दी को तैयार होने में तीन साल लगते हैं। यह हल्दी तिलक और कई पवित्र कार्यों में उपयोग में लाई जाती है। हल्दी की अच्छी कीमत मिलने पर किसान को इस खेती से घर बैठे ही अच्छी आय हो जाती है। श्रवण कुमार मंडी जिला में कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र में मास्टर ट्रेनर के रूप में नए किसानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। जिला में किसान श्रवण कुमार को अब हल्दी मैन के रूप में जानते है।
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श्रवण कुमार की मेहनत से आज हल्दी की खेती किसानों के लिए कमाऊ बन गई है। जिस खेती को किसान पहले अपने गुजारे के लिए करते थे। श्रवण कुमार ने हल्दी की खेती कमाऊ बनाने के साथ बेसहारा पशुओं और जंगली जानवरों की उजाड़ से बचने के लिए हल्दी की खेती का विकल्प भी दे दिया।
-अमर सिंह प्रशिक्षण अधिकारी, कृषि प्रशिक्षण केंद्र सुंदरनगर