मंडी। स्पेशल जज फैमिली कोर्ट मंडी की अदालत ने जाति के नाम पर सामाजिक बहिष्कार और जातीय भेदभाव करने के मामले में चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने चारों दोषियों को दो साल का कठोर कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना भरने का फैसला सुनाया है। जुर्माना न भरने पर छह महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा। अंतरजातीय विवाह के बाद अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाली महिला व उसके परिवार के साथ कुछ करीबी रिश्तेदारों ने ही सामाजिक बहिष्कार किया था। इस पर पुलिस थाना बल्ह में केस दर्ज हुआ था।
अभियोजन पक्ष के तथ्यों के अनुसार बल्ह तहसील के तमरोह चौंतड़ा गांव में एक महिला ने 2013 में ओबीसी वर्ग के व्यक्ति से विवाह किया था। कई वर्षों तक बाहर रहने के बाद जब वे गांव लौटे तो उन्हें सामाजिक स्वीकृति नहीं मिली। फरवरी 2022 में महिला के जेठ का निधन हुआ। जेठ के अंतिम संस्कार और तेरहवीं की सभी रस्में निभाईं लेकिन आरोपियों ने उनके साथ खुले तौर पर भेदभाव किया। महिला और उनके परिवार को मृतक के घर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। खाना अलग कमरे में दिया गया। इसी के साथ रसोई में घुसने पर रोक लगाई गई। पीड़िता ने पहले ग्राम पंचायत में शिकायत दी और बाद में पुलिस के पास मामला पहुंचा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच पड़ताल की। सभी औपचारिकताओं के बाद चालान कोर्ट में दायर किया।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, गवाहों के बयान, तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी देवेंद्र कुमार उर्फ धनीराम, पुष्पा देवी, उमावती देवी, हीरो देवी निवासी तमरोह चौंतड़ा को एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।