बगस्याड टिक्कर परवाड़ा परवाड़ा सड़क जिसका नामोनिशान मिट चुका है। संवाद
थुनाग (मंडी)। पांडवशिला-रूशाड़ सड़क पर विवाद गहराता जा रहा है। बुधवार को ग्राम पंचायत धार जरोल ने सड़क मरम्मत शुरू की लेकिन वन विभाग ने वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) उल्लंघन का हवाला देकर काम रोक दिया। इस दौरान ग्रामीणों और वन विभाग के कर्मियों के बीच हल्की नोकझोंक हुई। हालांकि पुलिस बल की मौजूदगी से स्थिति नियंत्रित रही।
यह सड़क 20 साल पहले पीएमजीएसवाई के तहत बनी थी। बीते 30 जून की प्राकृतिक आपदा में सड़क पूरी तरह तहस-नहस हो चुकी है। इससे वाहनों का आवागमन तो दूर पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीण लंबे समय से सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं लेकिन समाधान नहीं मिल रहा। सड़क बिना एफसीए मंजूरी के बनी थी जिसके चलते वन विभाग ने निर्माण पर रोक लगा दी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने भी मरम्मत से हाथ खींच लिए हैं। पंचायत ने मरम्मत शुरू की लेकिन वन विभाग ने जंजैहली थाने में एफआईआर दर्ज कराई जिससे मामला और उलझ गया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है। ग्रामीण प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
पंचायत प्रधान नरेश कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट ने 7 अक्तूबर तक सड़क को एंबुलेंस योग्य बनाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सड़क पीडब्ल्यूडी की है लेकिन वह काम नहीं कर रहा। पंचायत ने मजबूरी में काम शुरू किया लेकिन वन विभाग अड़चन डाल रहा है। ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने कहा कि एफसीए उल्लंघन की जांच चल रही है। बिना अनुमति काम पर एफआईआर दर्ज की गई है। डीएसपी करसोग गौरवजीत सिंह ने बताया कि मौके पर कानून व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस तैनात की गई है।