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Mandi News: बाढ़ ने दिया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की संभावनाओं को एक और झटका

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मंडी। पूर्व जयराम सरकार की ओर से बल्ह में प्रस्तावित किए गए ग्रीनलैंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण पर संकट गहरा गया है। यहां पर बीते 14 और 15 अगस्त को आई बाढ़ के चलते इस एयरपोर्ट की संभावनाओं को काफी प्रभावित किया है। इसके अलावा 15वें वित्तायोग की राशि भी अब तक नहीं मिलने से इसके निर्माण में कई बाधाएं सामने आ सकती हैं।विभिन्न किसान संगठन पहले ही इसका विरोध कर रहे हैं, वहीं आपदा के बाद अब यहां पर ग्रीनलैंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण पर सवाल उठने लगे हैं। बात यहां तक पहुंच चुकी है कि बरसात में बाढ़ की चपेट में आई बल्ह घाटी पर बारिश से हुए नुकसान की रिपोर्ट और इसके प्रभाव को ग्रीनलैंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सर्वे की रिपोर्ट में शामिल करने को कहा गया है। प्रदेश के पर्यटन विभाग ने बारिश से बल्ह घाटी में प्रस्तावित एयरपोर्ट पर क्या प्रभाव हो सकता है, इस बारे में पूरी जानकारी एकत्रित करने के आदेश प्रशासन को दिए हैं।
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इस ग्रीनलैंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण पर खतरा पहुंचाने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए प्रस्तावित सभी मुहालों में बाढ़ के कारण भारी नुकसान हुआ है। इन सभी मुहालों में हजारों की आबादी भी प्रभावित हुई है। इस संबंध में उपायुक्त मंडी अरिंदम चौधरी ने कहा कि सरकार के आदेशों के मुताबिक ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि भाजपा सरकार के समय 698 एकड़ जमीन को अधिगृहीत कर मंडी की बल्ह घाटी में ग्रीन फील्ड और नेशनल एयरपोर्ट बनाने की तैयारी शुरू हुई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सर्वेक्षण शुरू कर दिया था। बाद में यहां पर सरकार ने सामाजिक सर्वे भी करवाया, जिसकी रिपोर्ट में भी कुछ आपत्तियां देखी गई हैं।
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इन मुहालों को बाढ़ से पहुंचा नुकसान

अगर बल्ह घाटी में प्रस्तावित ग्रीनलैंड इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए प्रस्तावित जमीन की बात की जाए तो यहां पर इसके लिए प्रस्तावित पूरी जमीन को ही बाढ़ से नुकसान पहुंचा है। इसमें नागचला, टांवा, छातड़ू, कुम्मी, कंसा और ढावण में बाढ़ का बहुत भयंकर रूप देखा गया है। यहां पर घरां में पानी दो से चार फीट तक पहुंच गया था। ऐसे में यह क्षेत्र फ्लड जोन में आने के चलते अब यहां पर इस तरह का अड्डा बनने में बाधा आ सकती है।
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क्या कहते हैं किसान संगठन
बल्ह बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारी जोगिंद्र वालिया ने कहा कि बाढ़ ने इस बात को प्रमाणित कर दिया है कि किसी भी लिहाज से यहां पर हवाई अड्डा बनाना उपयुक्त नहीं है। इससे जहां 2,500 की आबादी प्रभावित होगी वहीं, करोड़ों रुपये की टमाटर उगाने वाली जमीन बर्बाद हो जाएगी। वहीं, हिमाचल किसान यूूनियन के प्रदेश महामंत्री तेजनाथ का कहना है कि वे हाल ही में सीएम से मिलकर इस बात को पुरजोर उठाएंगे कि आखिर यहां के किसानों को कितनी बार नुकसान उठाना पडेगा। अभी तक यहां के किसान बीएसएल परियोजना और फोरलेन का दंश झेल चुके हैं।
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