मंडी। रिवालसर झील के आसपास के घरों और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सेप्टिक टैंकों का दूषित पानी अब रिसाव के माध्यम से झील में नहीं समाएगा। चारों तरफ नालियों से भी अब बारिश का पानी झील में प्रवेश नहीं करेगा। जल शक्ति विभाग ने झील परिसर के चारों ओर सीवरेज लाइन बिछा कर सभी घरों और अन्य भवनों को सीवरेज लाइन से जोड़ दिया है। दूसरी ओर स्थानीय नगर पंचायत ने भी झील की ओर जाने वाले छोटे नालों का रुख मोड़ दिया है। इससे झील का पानी दूषित नहीं होगा। मछलियां भी दूषित पानी की वजह से अब असमय मौत के मुंह में नहीं समाएगी। बरसात के बाद हर साल दूषित पानी की वजह से झील में मछलियां मरती हैं।
रिवालसर हिंदू, सिख और बौद्ध संप्रदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है। रिवालसर में प्राकृतिक झील अपने तैरते द्वीपों और मछलियों के लिए प्रसिद्ध है। इस स्थान को लेकर तीनों धर्मों से संबंधित अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। बैसाखी पर्व पर इस झील में पवित्र स्नान किया जाता है। यहां तीन बौद्ध मठ हैं। इसमें गुरुद्वारा भी है। मंडी रियासत के तत्कालीन राजा जोगिंद्र सेन ने इस गुरुद्वारे का निर्माण 1930 में किया था। तीन धर्मों के अनुयायियों की आस्था वाली रिवालसर झील में असंख्य मछलियां मौजूद हैं। कुछ सालों से इन मछलियों के मरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। झील का पानी दूषित होना तथा झील में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के साथ-साथ लोगों के घरों व अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सेप्टिक टैंकों से रिसाव को भी इसकी वजह माना जाता रहा है। अब इन सभी समस्याओं का समाधान हो गया है। झील परिसर के आसपास के पूरे क्षेत्र को सीवरेज सुविधा से जोड़ दिया है।
झील परिसर के आसपास के पूरे क्षेत्र को सीवरेज सुविधा से जोड़ दिया है। कोई घर व भवन बिना सीवरेज कनेक्शन के नहीं रहा है। झील के चारों ओर छोटे नालों का रुख भी दूसरी ओर से मोड़ दिया है।
-राज कुमार, सहायक अभियंता, जल शक्ति विभाग