जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर में 8 करोड़ की लागत से तैयार बहुउद्देशीय भवन में रिसाव के कारण हो रहे नुकसान से विभागों में खींचतान बढ़ गई है। भवन के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठना शुरू हो गए हैं। करोड़ों रुपये की संपत्ति को इस्तेमाल में लाने को लेकर महाविद्यालय प्रशासन ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। नए सत्र के विद्यार्थियों की गतिविधियों पर भी रोक लगा दी है जबकि भवन का उद्घाटन करीब एक साल पहले हो चुका है।
महाविद्यालय परिसर में तैयार हो चुके इस भवन में करीब एक हजार विद्यार्थियों के एकत्रित होने के साथ आयोजनों के लिए मंच और साउंड सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट कक्षाओं के लिए भी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए वातानुकूल कमरे, शौचालय, पीने के पानी समेत अनेक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन रिसाव से इसके इस्तेमाल को लेकर संशय पैदा हो गया है। इधर, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निशा वैद्य का तर्क है कि भवन में पेश आ रही दिक्कतों के समाधान के बाद ही इसे अपने अधीन लिया जाएगा।
महाविद्यालय परिसर में करोड़ों की लागत से तैयार भवन में वर्षा के पानी के रिसाव की जानकारी मिली है। लोक निर्माण विभाग की तकनीकी टीम से फील्ड रिपोर्ट हासिल की जा रही है। भवन के निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की कोताही पाई जाती है तो आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-विद्या सागर, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग जोगिंद्रनगर