सुराहण गांव में पारंपरिक काहिका उत्सव में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद
पधर (मंडी)। घोघरधार की गोद में बसे सुराहण गांव में आयोजित पारंपरिक काहिका उत्सव में इस बार भी आस्था और चमत्कार का अनूठा संगम देखने को मिला। सदियों से चली आ रही इस परंपरा में आस्था के अनुसार देव शक्ति के चमत्कार से एक मृत नड़ को जीवनदान मिला। इससे पूरे क्षेत्र में आस्था की लहर दौड़ गई।
तीन दिन तक चले इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। शुक्रवार को उत्सव के समापन अवसर पर छिद्रा रस्म पूरी श्रद्धा से निभाई गई। नड़ परिवार द्वारा सजाए गए चार वेदों के नीचे बड़ी संख्या में लोग पापों से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचे थे। शाम के समय अचानक माहौल गमगीन हो गया जब मुख्य नड़ सोमदत्त उर्फ गुड्डू, देव हुरंग नारायण के रथ को छूते ही अचेत होकर गिर पड़े और उनका शरीर निष्प्राण हो गया।
रथ को गांव के एक छोर पर स्थापित कर नड़ की देह को अर्थी के रूप में पूरे गांव की परिक्रमा कराई गई। इस दौरान परिजन और ग्रामीण शोक में डूब गए। विधि-विधान के अनुसार, देव हुरंग नारायण के भेखले की लकड़ी से बने विशाल मोहरे को नड़ के सीने पर घुमाया गया। देव के गुर कमलदेव ने मृत पड़े सोमदत्त के कान में जोर से कहा ‘उठ गुड्डुआ, दयो लगी रा साददा’। इस पुकार के साथ ही सोमदत्त की देह में धीरे-धीरे प्राण लौटने लगे। देव चमत्कार के इस दृश्य को देख सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ जयघोषों से गूंज उठी।