मंडी। बरोट बांध से सिल्ट निकालकर ऊहल खड्ड में छोड़ने को लेकर पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि ऊहल से सिल्ट अब ब्यास में पहुंच रही है। इससे कई पेयजल योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। मंडी शहर को भी ऊहल से ही पानी आता है। देव भूमि पर्यावरण रक्षक मंच के अध्यक्ष नरेंद्र सैणी ने बताया कि तीन दिसंबर को प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग को जानकारी दी थी।
बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। ऊहल और ब्यास में सिल्ट से जीव-जंतू मर रहे हैं। ट्राउट मछलियों का अस्तित्व भी खतरे में है। पिछले वर्ष मत्स्य विभाग ने कमांद के पास ऊहल में ट्राउट मछलियों के रेनवो और ब्राऊन के 10 हजार बीज डाले थे। वे जहरीली सिल्ट के कारण तबाह हो गए हैं। डीसी मंडी अपूर्व देवगन ने कहा कि ऊहल खड्ड में सिल्ट छोड़ने का मामला ध्यान में आया है। जल्द ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को मौके पर जाने के निर्देश दिए जाएंगे। संवाद