मंडी/नेरचौक (मंडी)। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान नेरचौक मेेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में गंभीर बीमारियों का पता लगाने के लिए किए जाने वाले एंडोस्कोपी टेस्ट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस टेस्ट के लिए मरीजों को शिमला या मंडी के लिए रेफर किया जा रहा है।
रोजाना पांच से दस मरीजों को यहां से शिमला या फिर चंडीगढ़ में टेस्ट करवाने के लिए भेजा जा रहा है। एंडोस्कोपी टेस्ट की सुविधा आज तक इस संस्थान में नहीं मिल रही है। मंडी में केवल एक ही ऐसा निजी संस्थान है, जहां पर एंडोस्कोपी टेस्ट की सुविधा है। महंगा होने के चलते मरीज टेस्ट नहीं करवा पा रहे हैं। सुविधा न मिलने से मरीजों में रोष है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग से गुहार लगाई कि एंडोस्कोपी टेस्ट की सुविधा मुहैया करवाई जाए।
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निजी लैब में 3300 से 5000 तक वसूले जाते हैं दाम
निजी लैब में एंडोस्कोपी टेस्ट 3300 से 5000 रुपये में किया जाता है। अगर डॉक्टर विशेषज्ञ न हो तो यह टेस्ट करवाना जोखिम भरा हो जाता है। एंडोस्कोपी टेस्ट ऐसी स्टेज में करवाने को कहा जाता है जब हर तरह का इलाज करने के बाद भी मरीज को आराम नहीं मिल रहा हो। या उसकी बीमारी समझ में नहीं आ रही हो। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को सलाह देते हैं कि वे यह टेस्ट करवाएं ताकि बीमारी का पता चल सके। टेस्ट के लिए एक छोटा सा कैमरा मरीज के मुंह और गले से गुजारा जाता है।
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एंडोस्कोपी टेस्ट के लिए गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट की तैनाती होनी चाहिए। अगर सरकार गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट की तैनाती कर दे तो टेस्ट के उपकरणों को उपलब्ध करवाया जा सकता है।
-रूप चंद ठाकुर, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज नेरचौक