जोगिंद्रनगर अस्पताल में वेटिंलेटर, आधुनिक सुविधाओं और संसाधनों के अभाव से गंभीर मरीजों की बढ़ीं परेशानियां
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। स्थानीय उपमंडल में पीलिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर मरीजों को उपचार दिलाने के लिए मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सक की भी तैनाती कर दी है, लेकिन अस्पताल में वेटिंलेटर, आधुनिक सुविधाओं और संसाधनों के अभाव के चलते गंभीर मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। संक्रमित मरीजों को अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ दिलाया जा रहा है।
गंभीर मरीजों को अस्पताल में उपचार दिलाने के लिए वेटिंलेटर की सुविधा और इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक न होन ने 80 और 100 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज नेरचौक और टांडा में मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। बीते कुछ दिनों में करीब 20 पीलिया के मरीज टांडा और नेरचौक मेडिकल कॉलेजों में उपचार के लिए रेफर करने पड़े। रोगी वार्ड में पीलिया संक्रमित मरीजों के दाखिले की बात करें तो सोमवार को भी अस्पताल करीब 30 मरीज दाखिल थे।
स्पेशल वार्ड में भी पीलिया के मरीजों को उपचार दिलाया गया। वहीं, ओपीडी में भी पीलिया के लक्षण पाए जाने पर मरीजों के टेस्ट करवाए गए। करीब 300 से अधिक मरीज सोमवार को भी जोगिंद्रनगर अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे। इनमें कुछ मरीजों के डेंगू, स्क्रब टाइफस के भी लक्षण मिले हैं। हालांकि इन मरीजों की संख्या बेहद कम है।
उधर, अस्पताल के एसएमओ डाॅ. रोशन लाल कौंडल ने बताया कि जोगिंद्रनगर अस्पताल में पीलिया के मरीजों को उपचार दिलाने के लिए दवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर दी गई हैं। फार्मासिस्टों की भी रात्रिकालीन सेवाएं ली जा रही हैं। केवल गंभीर मरीजों को ही अस्पताल के बाहर उपचार के लिए रेफर किया जा रहा है। पीलिया से पैदा हुए हालात भी अब सामान्य होते जा रहे हैं।
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टेस्ट के दौरान बेहोश हो गई स्कूली छात्रा
सोमवार को नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में टेस्ट करवाने पहुंची स्कूल की छात्रा अचानक बेहोश हो गई। उसे रोगी वार्ड में उपचार के लिए दाखिल करवाना पड़ा। छात्रा की पहचान अंतरा कटोच निवासी बनाई हार के रूप में हुई है। अंतरा कटोच शहर के एक सरकारी स्कूल में परीक्षा देने पहुंचीं थीे। इसके बाद परिजन उसे जब नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य जांच के लिए ले गए तो तभी प्रयोगशाला के बाहर खून टेस्ट के दौरान अचानक बेहोश होकर फर्श पर गिर पड़ी।
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अस्पताल के रोगी वार्डों में पानी का संकट
जोगिंद्रनगर अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों के लिए पानी का संकट भी बना हुआ है। शौचालयों के नल सूख जाने से मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। तीमारदारों को अपने हाथ धोने के लिए भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को जोगिंद्रनगर अस्पताल के महिला, पुरुष, सर्जिकल यहां तक कि शिशु रोगी वार्ड में भी पानी का संकट बना रहा। इस दौरान तीमारदारों को मरीजों के बर्तन साफ करने के लिए दर-दर भटकना पड़ा।