मंडी। सात साल से अलग रह रहे दंपती ने आखिरकार आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध खत्म कर लिए। फैमिली कोर्ट मंडी के प्रधान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर तलाक की डिक्री जारी की।
पत्नी के स्त्रीधन, स्थायी गुजारा भत्ता और अन्य दावों के पूर्ण एवं अंतिम निपटारे के लिए पति ने 11 लाख रुपये देने पर सहमति जताई। बल्ह तहसील के निवासी व्यक्ति और भंगरोटू निवासी महिला का विवाह 8 मार्च 2019 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था।
दोनों की कोई संतान नहीं है। विवाह के करीब दो माह बाद मई 2019 से दोनों अलग-अलग रह रहे थे। आपसी मतभेदों के चलते दोनों का साथ रहना संभव नहीं हो पाया। दोनों ने 26 अगस्त 2026 को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की।
पहली और दूसरी मोशन में अदालत ने दोनों के बयान दर्ज किए। दोनों ने कहा कि वे अब साथ नहीं रह सकते और सुलह की कोई संभावना नहीं है। अदालत ने दोनों की स्वतंत्र और स्वैच्छिक सहमति और सभी दावों के अंतिम निपटारे से संतुष्ट होकर छह माह की कूलिंग ऑफ अवधि भी माफ कर दी।