थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र में 30 जून की रात आई प्राकृतिक आपदा ने सेब बागवानों की आजीविका को तहस-नहस कर दिया। भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की त्रासदी ने बगस्याड़, जंजैहली, छतरी, थुनाग, बहलीधार, शिल्हीबागी और चिऊणी जैसे सेब बहुल क्षेत्रों में लाखों पेटी सेब की फसल को बर्बाद कर दिया।
क्षेत्र में सालाना 8 से 10 लाख पेटी सेब का कारोबार होता है, लेकिन इस बार फसल नष्ट होने से बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। बागवानी ही स्थानीय लाेगों की मुख्य आजीविका का साधन है। जंजैहली के बागवान गीतानंद, बिके राम, बबलू और रितेश ने बताया कि पानी का बहाव इतना था कि सेब से लदे पेड़ बह गए। बगस्याड़ के चतर सिंह ठाकुर, अंकुर ठाकुर और खुशहाल सिंह ने कहा कि इस बार फसल शानदार थी। 15 जुलाई से तुड़ान शुरू होने वाला था लेकिन आपदा ने सब तबाह कर दिया। छतरी के मोहर सिंह, चेतन और भागमल ने दुख जताया कि सेब उनकी आय का एकमात्र साधन था, जो अब पूरी तरह चौपट हो गया।
थुनाग, बहलीधार और चिऊणी में भी सेब के बगीचे और मटर की फसल को भारी नुकसान पहुंचा। बागवानों रमेश ठाकुर, राम लाल, चंद्रमणि, दिवान चंद, हेम राज, पवन कुमार, लाभ सिंह, मोहर सिंह, राम सिंह और सेवक राम ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त बगीचों का तत्काल मूल्यांकन कर मुआवजा देने की मांग की है। सराज किसान सभा के अध्यक्ष बिहारी लाल ने कहा कि फसल बीमा योजना से मामूली मदद मिलती है, लेकिन बगीचों के जीर्णोद्धार के लिए विशेष वित्तीय सहायता की जरूरत है।