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डिजिटल अरेस्ट ठगी : धनराशि डूबने के बावजूद शातिरों के संपर्क में महिला

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धर्मपुर (मंडी)। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 15.50 लाख रुपये गंवाने वाली महिला अब भी साइबर ठगों के संपर्क में है। उसे उम्मीद है कि पुलिस की मदद से उसकी पूरी रकम वापस मिल जाएगी। इसी भरोसे में वह ठगों से हो रही बातचीत को पूरी तरह बंद नहीं कर रही है। पुलिस भी महिला से संपर्क में रहकर ठगी से जुड़े खातों और लेनदेन की जांच कर रही है।
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पीड़िता गृहिणी है, जबकि उसके पति निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं। परिवार ने वर्षों की मेहनत से छोटी-छोटी बचत कर रकम जुटाई थी। उसने अपनी जमा पूंजी आरडी (आवर्ती जमा) के माध्यम से जोड़ी थी। डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने उसे इस कदर डराया कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए रखी पूरी रकम एक ही झटके में चली गई।

ठगों ने करीब एक महीने तक उसे अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के नाम पर डराए रखा। कभी सीबीआई, कभी पुलिस तो कभी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की। कार्रवाई का डर दिखाने के साथ पति और बेटे को अगवा करने की धमकी भी दी गई।
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ठगों ने महिला को यह भरोसा दिलाया था कि जांच पूरी होने के बाद उसकी रकम वापस खाते में डाल दी जाएगी। इसी झांसे में उसने दो बार में कुल 15.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम जाने के बाद भी कुछ समय तक वह ठगों की बातों पर विश्वास करती रही।
जब ठगी का अहसास हुआ तो महिला ने परिवार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस से शिकायत की गई। अब परिवार को उम्मीद है कि साइबर पुलिस बैंक खातों और लेनदेन की कड़ियां जोड़कर ठगी गई रकम वापस दिलाने में मदद करेगी। पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच पड़ताल की जा रही है।
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