सुंदरनगर में देवता मेला के शुभारंभ पर मेला मैदान के लिए अपने देवलुओं संग जाते बड़ा देव कमरुनाग।
सुंदरनगर (मंडी)। पूर्व सुकेत रियासत का प्राचीन एवं राज्य स्तरीय देवता मेला शनिवार को देव श्री कमरूनाग एवं राज देवता श्री मूल माहूंनाग के पूजन के साथ विधिवत शुरू हो गया। पांच दिनों तक चलने वाले इस देवता मेला में सुकेत और मंडी जनपद के करीब 200 देवी-देवता भाग ले रहे हैं। मेला के शुभारंभ से पूर्व शुकदेव ऋषि की तपोस्थली शुकदेव वाटिका में देवी-देवताओं के रथ देवलुओं के साथ पहुंचे। यहां निदेशक मत्स्य पालन विवेक चंदेल ने बतौर मुख्यातिथि देवी-देवताओं का पूजन कर परंपराओं का निर्वहन किया।
इसके उपरांत दोपहर 2:30 बजे शुकदेव वाटिका से भव्य शोभायात्रा भोजपुर बाजार होते हुए मेला स्थल जवाहर पार्क के लिए निकली। रास्ते में लोगों ने देवी-देवताओं का स्वागत किया और पुष्प अर्पित किए। बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने रंग-बिरंगी पगड़ियां बांधकर शोभायात्रा में हिस्सा लिया।
मेले के शुभांरभ अवसर पर सभी देवी-देवताओं के रथ सुबह से ही शुकदेव वाटिका में विराजमान होने शुरु हो गए थे। जहां 1 बजे मुख्यातिथी ने देवता मेला में पंहुचे देव कमरुनाग, पूर्व सुकेत रियासत के अराध्य देव मूल मांहूनाग सहित अन्य देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इस मौके पर मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं एसडीएम गिरीश समरा, तहसीलदार अंकुश शर्मा, डीएसपी भारत भूषण, बीडीओ विवेक चौहान, समाजसेवी एजी शेख, सुकेत सर्व देवता कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अभिषेक सोनी सहित अनेक गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।
हमारी समृद्ध सभ्यता और संस्कृति के प्रतीक हैं मेले : विवेक चंदेल
मत्स्य पालन विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने कहा है कि प्रदेश में समृद्ध परंपरा में रियासत काल से मनाए जा रहे सुकेत देवता मेला का प्रमुख स्थान है। शुकदेव ऋषि की तपोस्थली में आयोजित होने वाला यह मेला देव आस्था एवं परंपरा का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि मेले हमारी समृद्ध सभ्यता व संस्कृति के प्रतीक हैं। मेलों के माध्यम से न केवल आपसी भाईचारे की भावना को बल मिलता है, बल्कि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी यह अहम भूमिका निभाते हैं।
सुंदरनगर में देवता मेला के शुभारंभ पर मेला मैदान के लिए अपने देवलुओं संग जाते बड़ा देव कमरुनाग।