मंडी। घने देवदारों के दिलकश नजारे से घिरे गोहर के रमणीय पर्यटन स्थल देवीदढ़ की बात ही कुछ और है। यहां का नैसर्गिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ता।
सरकार, प्रशासन और पंचायत पर्यटन स्थल को विकसित कर यहां की सुंदरता को चार चांद लगा रही है। सैलानियों को लुभाने के लिए देवदारों के बीच खुले मैदान में पार्क विकसित किया गया है। प्रवेश द्वार पर कदम रखते ही कुछ दूर आगे चलकर यहां कृत्रिम झील है।
सैलानी रुह को सुकून देने वाली वादियों में महज बीस रुपये प्रति सवारी में बोटिंग का आनंद उठा सकते हैं। झील के बगल में ट्री हाउस है। वाकिंग ट्रेल बच्चों के लिए बनी झूलों तक पहुंचाती है। बच्चों के लिए झूले मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं। ठहरने के लिए पर्यटन विभाग में गैंपलिंग (लग्जरी टैंट) और टैंट की सुविधा दी है। पर्यटक देवीदढ़ में वन विश्राम घर में रह सकते हैं। पर्यटन विभाग इस पर्यटन स्थल को नई मंजिल नई राहें योजना में जोड़ने जा रहा है।
दो ट्रैकिंग रूट रोमांच से भरे
देवीदढ़ से जुड़े दो ट्रैकिंग ट्रैक रोमांच से भरे हैं। देवीदढ़-जंजैहली-शिकारी देवी 15 ट्रैक और देवीदढ़-कमरुनाग दस किमी ट्रैक में कठिन रास्ते से होकर सैलानी देवीदढ़ पहुंच सकते हैं। सर्दियों में इन ट्रैक पर पाबंदी रहती है। गर्मियों के सीजन में टूरिस्ट गाइड की मदद से इस पर ट्रैकिंग की जा सकती है। इन ट्रैकिंग की जीपीएस मैपिंग भी की गई है।
कैसे पहुंचें देवीदढ़
मंडी से देवीदढ़ की दूरी लगभग 42 किलोमीटर है। मंडी-जंजैहली मार्ग पर चैलचौक से आगे इस पर्यटन स्थल के लिए लिंक रोड बना है। इस दूरी को बस की मदद से आसानी से पूरा किया जा सकता है। देवीदढ़ से निकटतम रेलवे स्टेशन 111 किलोमीटर दूर जोगिंद्रनगर में है। यह एक छोटी लाइन रेलवे स्टेशन है, जो मुख्य लाइन से पठानकोट में जुड़ हुआ है। देवीदढ़ से नजदीकी हवाई अड्डा 94 किलोमीटर की दूरी पर कुल्लू भुंतर में है। मंडी तक आसानी से सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।
गर्मियों में ही बनाए प्लान
देवीगढ़ ट्रैक के रास्ते में जंजैहली, शिकारी देवी, कमरुनाग जैसे लोकप्रिय जगहें भी हैं। देवीदढ़ की जलवायु पूरे साल बहुत ठंडी रहती है। यहां भारी बर्फबारी होती है। यही कारण है कि देवीदढ़ आने का सबसे सही समय गर्मियों का मौसम होता है। इस दौरान बहुत से पर्यटक यहां घूमने आते हैं। सर्दियों में यहां घूमना खतरे से खाली नहीं है।
11 लकड़ी के पुलों का रोमांच
अद्भुत खूबसूरती और खज्जियार की तरह दिखने के कारण देवीदढ़ को मिनी खजियार भी कहा जाता है। यहां जंगल के बीचोंबीच बहुत पुराना पुल है, जो दिखने में बहुत ही ज्यादा आकर्षक है। इस पुल का नजारा बहुत खूबसूरत है। वन विभाग ने इस तरह के करीब 11 पुलों का सौंदर्यकरण कर विकसित किया है। जो सैलानियों को लुभाते हैं।
7800 फीट : मुंडसन माता मंदिर आर्कषण का केंद्र
समुद्री सतह से लगभग 7800 फीट की ऊंचाई पर स्थित देवीदढ़ जौनी घाटी का अंतिम गांव है। यहां मुंडसन माता का मंदिर है। मंदिर के आसपास का नजारा भी बहुत खूबसूरत है। यह मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां दूर-दूर से सैलानी आते और मां के मंदिर में आकर शीश नवाते हैं।
मंडी को पर्यटन हब बनाने के लिए भरपूर प्रयत्न हो रहा है। सरकार, प्रशासन और ग्राम पंचायतों के सामंजस्य से देवीदढ़ की तरह कई अनछुए पर्यटन स्थलों को विश्व पर्यटन के मानचित्र पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-अरिंदम चौधरी, उपायुक्त मंडी