मंडी के पराशर ऋषि मंदिर में विराजमान देवता की मूर्ति
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मंडी। महाशिवरात्रि के लिए 27 फरवरी को श्री देव पराशर मूल स्थान भंडार (कोठी) बांधी से सुबह नौ बजे रवाना होंगे। श्री देव पराशर ऋषि का रास्ते में श्रद्धालुओं के घर बरोण गांव में रात्रि ठहराव होगा। 28 फरवरी को दूसरा ठहराव पंडोह में और एक मार्च को 200 देवलुओं के साथ मंडी में करीब दो बजे तक पैदल पहुंचेंगे।
देवता का मंडी पहुंचने पर राज देवता माधव राय की छड़ी द्वारा स्वागत किया जाएगा। उसके बाद देवता की छड़ी समेत नरसिंग और सूरज पंख राज देवता के साथ भव्य मिलन करने राज बेहड़े पहुंचेंगे। इसके बाद देवता राज बेहड़े में सात दिन तक विराजमान रहेंगे। देवता के नरसिंगे और सूरज पंख का रात्रि ठहराव सात दिन तक राज बेहड़े में ही होगा।
देवता देवलुओं के साथ पैदल ही मंडी जाते हैं। अकूत संपत्ति के मालिक देव पराशर ऋषि मंडी राजघराने के कुल देवता होने के कारण उन्हें आशीर्वाद देते हैं। राजपरिवार सदियों से ऋषि पराशर के साथ यह परंपरा निभा रहा है। राज घराने का कुल देवता होने के कारण ऋषि पराशर की मंडी शिवरात्रि में महत्वपूर्ण भूमिका है।
पराशर ऋषि मंदिर के प्रधान बलवीर सिंह ठाकुर ने बताया कि मंडी शिवरात्रि मेले के दौरान जो जाग का आयोजन किया जाता है वह ऋषि पराशर के माध्यम से करवाई जाती है। शिवरात्रि में भी ऋषि पराशर जाग की अनूठी परंपरा को आज भी निभा रहे हैं। जाग का आयोजन इसलिए किया जाता है कि वातावरण में जो अदृश्य दुष्ट आत्माएं हैं, उनका हनन हो। इसके लिए ऋषि पराशर का गूर खेलकर जाग के कुंड में आहुति देते हैं। इसके बाद ऋषि शुकदेव का गूर खेलता है और उसके बाद अलग-अलग देवी-देवताओं के गूर भी अपने-अपने क्रमानुसार खेलते हैं।
इस परंपरा का आयोजन रियासत काल से चला आ रहा है। देव पराशर 8 मार्च को चौहटा जातर के बाद मूल स्थान की ओर रवाना हो जाएंगे।