एग्रीवेट-2026 के दूसरे दिन 45 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत
पोस्टर सत्र में 40 से अधिक प्रतिभागियों ने दिखाई प्रतिभा
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और खेती और पशुपालन को टिकाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने नए शोध और आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया। अभिलाषी विश्वविद्यालय चैलचौक में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एग्रीवेट-2026 के दूसरे दिन कृषि, पशु पोषण, औषधीय पौधों और उन्नत फसलों पर चर्चा हुई। इस दौरान 45 से अधिक शोधार्थियों ने मौखिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। जबकि 40 से अधिक प्रतिभागियों ने पोस्टर सत्र में अपने शोध प्रदर्शित किए। उत्कृष्ट शोधार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय लुधियाना के डॉ. यशवंत सिंह ने जलवायु अनुकूल डेयरी उत्पादन और टिकाऊ पशुपालन की रणनीतियां साझा कीं। पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. राकेश कुमार ने औषधीय पौधे कुठ पर शोध की जानकारी देते हुए इसकी जड़ों में मौजूद तत्वों की कैंसररोधी संभावनाओं का उल्लेख किया। पशुपालन विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. अरुण शर्मा ने औषधीय पौधों की खेती को किसानों की आय बढ़ाने का विकल्प बताया।
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के डॉ. सलेज सूद ने प्रतिकूल मौसम में बेहतर उत्पादन देने वाली आलू की किस्मों के विकास पर जानकारी दी। वहीं, पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय की डॉ. बृज बनिता ने पशु पोषण पर शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पीएचडी और एमएससी शोध पत्र श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को मेरिट पुरस्कार दिए गए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. आरके अभिलाषी, कुलपति प्रो. एचके चौधरी और सम्मेलन संयोजक प्रो. पीसी शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।