बल्ह क्षेत्र के लूणापानी में भाषा विभाग की ओर से आयोजित लोक नृत्य संगोष्ठी कार्यक्रम में भाग लेत?
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मंडी। मांडव्य कला मंच और जिला भाषा संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में लूणापानी में संस्कृति के संवाहक लोकनृत्य विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के प्रथम स्नातकोत्तर कथक नर्तक दिनेश गुप्ता ने बतौर स्रोत व्यक्ति शिरकत की।
उन्होंने कहा कि वास्तविकता में अपने मन के उद्गारों को व्यक्त करना नृत्य है और नृत्य अंगों की सुंदर भाषा है। भारतीय नृत्य का इतिहास बहुत प्राचीन है। भरतमुनि का नाट्यशास्त्र नृत्य का प्राचीनतम ग्रंथ है। इस अवसर पर संस्कृति क र्मी कुलदीप गुलेरिया ने कहा कि नृत्य खुशी व्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है।
कोई भी समारोह नृत्य के बिना संभव नहीं है। शास्त्रीय और लोकनृत्य संस्कृति के संवाहक और धरोहर हैं। इस दौरान हिमाचल के सभी जिलों के नृत्यों पर चर्चा की। गुलेरिया ने कहा कि नृत्य से मनुष्य स्वस्थ रहता है। इसलिए संस्कृति के संवाहक लोक नृत्यों का संरक्षण एवं संवर्धन आवश्यक है।
इस अवसर पर मंच के संस्थापक सदस्य मोहन ठाकुर, वरिष्ठ कलाकार दुर्गादास, हास्य कलाकार हरवंश अरोड़ा, संगीत प्रवक्ता ललिता कुमारी, कलाकार राजेश, हरिचरण, काजल, संगीता, लतेश, स्मृति, पवन ने भी चर्चा में भाग लिया। इस अवसर पर युवक मंडल लूणापानी, बडसू मांडल तथा मांडव्य कला मंच के अनेक पदाधिकारी सदस्य एवं लोक कलाकार उपस्थित रहे। संवाद