सुंदरनगर (मंडी)। अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के प्रथम पुरुष कथक स्नातकोत्तर दिनेश गुप्ता ने इसका महत्व बताया। उन्होंने बताया कि यह दिवस आधुनिक बैले के जन्मदाता जीन जॉर्जेस नोवरे के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। नृत्य अंगों की सुंदर भाषा है और विद्वानों ने यह प्रमाणित किया है कि किसी भी भाषा के आने से पहले नृत्य का जन्म हो चुका था।
नृत्य मन के उद्गारों को व्यक्त करने का एक माध्यम है। आज भारतवर्ष में 500 से भी अधिक लोक नृत्य, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम, ओडिसी, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी, क्षत्रिय, मयूरभंज जैसे शास्त्रीय नृत्य प्रचलित हैं। अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस के उपलक्ष्य में कई संस्थाओं की ओर से कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। नृत्य जहां एक ओर मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है वहीं शारीरिक स्वास्थ्य को भी संभाले हुए हैं। संवाद