जोगिंद्रनगर (मंडी)। नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। आलम यह है कि आपातकालीन सेवाओं में पहुंचे गंभीर मरीजों को भी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। 100 बिस्तरों वाले इस उपमंडलीय अस्पताल में स्वीकृत 19 चिकित्सकों में से 10 पद खाली पड़े हैं। ओपीडी में रोजाना औसतन 300 से 400 मरीज पहुंचते हैं, लेकिन मात्र आठ डॉक्टरों के भरोसे पूरी व्यवस्था चल रही है।
अस्पताल में हड्डी, आंख, चर्म रोग, शल्य चिकित्सा (सर्जरी) और बाल रोग विशेषज्ञों के पद लंबे समय से खाली हैं। इसके कारण उपमंडल की 55 पंचायतों और करीब डेढ़ लाख की आबादी को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपात सेवा में कतार में खड़े तीमारदारों कंचन और बीरबल ने बताया कि डॉक्टरों की कमी से यह केंद्र अब महज एक रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। उल्टी, दस्त और तेज बुखार जैसे सामान्य मरीजों का इलाज भी मुश्किल हो गया है, जबकि सांस, हृदय व न्यूरो के गंभीर मरीजों को टांडा और नेरचौक मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी डॉ. अशोक चौहान ने बताया कि रिक्त पदों को भरने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नियमानुसार प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। कहा कि अस्पताल में मौजूद चिकित्सक पूरी निष्ठा और ईमानदारी से मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास कर रहे हैं।